364 दिन बंद रहती है गुफा, आज खुला मां लिंगेश्वरी का दरबार
कपाट खुलते ही उमड़ा आस्था का सैलाब, संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर दूर-दूर से पहुंचे दंपती

फरसगांव (कोंडागांव)। मां लिंगेश्वरी गुफा के कपाट 364 दिनों के लंबे इंतजार के बाद 23 सितंबर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। फरसगांव ब्लॉक के ग्राम आलोर-झाटीबन की पहाड़ी पर स्थित इस प्राकृतिक गुफा का द्वार खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। संतान प्राप्ति की धार्मिक मान्यता के चलते दूर-दराज से बड़ी संख्या में दंपती भी माता के दरबार पहुंचे।
गुफा के कपाट खुलते ही आलोर की पहाड़ी पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। माता के दर्शन के लिए सुबह से ही दूर-दराज से लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। कोई मनोकामना लेकर पहुंचा तो कोई वर्षों से चली आ रही अपनी आस्था और परंपरा को निभाने। संतान प्राप्ति से जुड़ी स्थानीय धार्मिक मान्यता के चलते बड़ी संख्या में दंपती भी माता के दरबार में पहुंचे।
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सालभर बंद रहता है गुफा का द्वार
मां लिंगेश्वरी मंदिर की सबसे खास पहचान इसकी अनोखी परंपरा है। पहाड़ी के भीतर प्राकृतिक गुफा में स्थित माता के दरबार का द्वार सामान्य दिनों में बंद रहता है और वर्ष में निर्धारित एक अवसर पर ही श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इसी वजह से कपाट खुलने का दिन श्रद्धालुओं के लिए किसी बड़े पर्व से कम नहीं माना जाता। पूरे साल के इंतजार के बाद गुफा का द्वार खुलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आलोर की पहाड़ी पहुंचते हैं।
संतान प्राप्ति की मान्यता से जुड़े हैं दंपती
मां लिंगेश्वरी के दरबार को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच संतान प्राप्ति से जुड़ी विशेष धार्मिक मान्यता प्रचलित है। इसी आस्था के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से दंपती यहां पहुंचते हैं और माता के समक्ष अपनी मनोकामना रखते हैं। स्थानीय परंपरा में खीरा-ककड़ी का भी विशेष महत्व बताया जाता है। श्रद्धालु इसे माता का प्रसाद मानकर ग्रहण करते हैं और मनोकामना पूरी होने की धार्मिक आस्था रखते हैं।
प्राकृतिक गुफा के भीतर क्या है?
पहाड़ी की प्राकृतिक गुफा में स्थित यह धार्मिक स्थल लंबे समय से श्रद्धालुओं और लोगों के बीच कौतूहल का विषय रहा है। गुफा की प्राकृतिक बनावट और उससे जुड़ी धार्मिक परंपराएं इसे क्षेत्र के अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती हैं। गुफा का द्वार वर्ष में केवल एक बार खुलने के कारण यहां दर्शन का अवसर सीमित रहता है। यही वजह है कि कपाट खुलने वाले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आलोर की पहाड़ी तक पहुंचते हैं।
आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम
मां लिंगेश्वरी का यह दरबार पूजा-अर्चना के साथ प्राकृतिक गुफा और उससे जुड़ी धार्मिक परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। कपाट खुलने के साथ ही आलोर-झाटीबन क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया है। एक साल का इंतजार, कुछ घंटों के दर्शन और माता के दरबार में मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हजारों श्रद्धालु—आलोर की मां लिंगेश्वरी की यही अनोखी धार्मिक परंपरा हर वर्ष लोगों को यहां खींच लाती है।



