Raipur

रायपुर प्रेस क्लब में फायरिंग की चर्चा, सदस्यता विवाद पर उठे सवाल

सदस्यता में कथित मनमानी से बढ़ता रहा पत्रकारों का आक्रोश, शिव दत्ता की भूमिका पर भी उठे सवाल; CCTV फुटेज और पिस्तौल की जांच से खुलेगी घटना की परतें

रायपुर hct : रायपुर प्रेस क्लब में सदस्यता को लेकर लंबे समय से सुलग रहा असंतोष अब गंभीर विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। नए पत्रकारों को सदस्यता नहीं मिलने की शिकायतों के बीच प्रेस क्लब में कथित हवाई फायरिंग की घटना ने पूरे मामले को गरमा दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पलाश तिवारी पर शाम करीब छह बजे प्रेस क्लब परिसर में पिस्तौल से हवाई फायरिंग करने का आरोप है। हालांकि, गोली चलने की पुष्टि CCTV फुटेज और पुलिस जांच से होना बाकी है।

प्रेस क्लब में सदस्यता को लेकर नाराजगी कोई नई बात नहीं है। आरोप है कि पूर्व अध्यक्ष दामू आम्बेडारे के कार्यकाल से शुरू हुआ विवाद बाद की कार्यकारिणियों के समय भी जारी रहा। पत्रकारों के बीच यह सवाल उठता रहा है कि आखिर मैदानी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों को सदस्यता के लिए इंतजार क्यों करना पड़ता है और सदस्यता देने के मापदंड सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते?

अध्यक्ष कोई भी हो, प्रभाव किसका चलता है?

प्रेस क्लब की आंतरिक व्यवस्था को लेकर शिव दत्ता की भूमिका भी लगातार चर्चा में रहने का दावा किया जा रहा है। आरोप हैं कि सदस्यता के इच्छुक पत्रकारों की सूची और चयन प्रक्रिया में उनकी भूमिका प्रभावशाली रही है तथा कुछ चहेते लोगों को प्राथमिकता दिए जाने से मैदानी पत्रकारों में नाराजगी बढ़ी। इन आरोपों की जांच सदस्यता आवेदनों, चयन सूची और कार्यकारिणी के निर्णयों के आधार पर होनी चाहिए।

पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर के कार्यकाल से जुड़ी सदस्यता संबंधी नाराजगी को भी पत्रकारों के एक वर्ग ने चुनावी असंतोष का कारण बताया है। वर्तमान अध्यक्ष मोहन तिवारी के सामने भी यही चुनौती है। सदस्यता देने के आश्वासनों के बावजूद यदि असंतुष्ट पत्रकारों को पारदर्शी प्रक्रिया नहीं मिलती, तो नेतृत्व की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फायरिंग की चर्चा, अब जांच पर निगाहें

घटना के बाद प्रेस क्लब पदाधिकारियों द्वारा CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। पलाश तिवारी के पूर्व में पदाधिकारियों से विवाद और कथित अभद्र व्यवहार की शिकायतों का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन सभी बिंदुओं की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

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पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि वास्तव में फायरिंग हुई या नहीं, पिस्तौल कहां से आई, उसका लाइसेंस है या नहीं और हथियार किसके नाम पर है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

शिव दत्ता की भूमिका की जांच और कार्रवाई की मांग

प्रेस क्लब की सदस्यता प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप और पक्षपात के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। शिव दत्ता की भूमिका में अनियमितता या पद के दुरुपयोग के प्रमाण मिलते हैं, तो उन्हें जिम्मेदारी से हटाने और क्लब के नियमों के अनुसार बर्खास्तगी सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई पर निर्णय लिया जाना चाहिए।

प्रेस क्लब किसी व्यक्ति या गुट की निजी जागीर नहीं है। यह पत्रकारों का साझा संस्थान है। यदि सदस्यता में पारदर्शिता नहीं होगी और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होगी, तो असंतोष बढ़ना तय है। अब सवाल केवल कथित फायरिंग का नहीं, बल्कि प्रेस क्लब की व्यवस्था, जवाबदेही और पत्रकारों के भरोसे का भी है।

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