Bilaspur

NTPC सीपत रोजगार शिकायत: जांच में देरी, मुख्य सचिव तक पहुंचा मामला

भूमि अधिग्रहण के बदले रोजगार और वरिष्ठता सूची में कथित अनियमितताओं की शिकायत; 15 दिन में जांच रिपोर्ट देने के आदेश के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं होने का शिकायतकर्ता का आरोप

बिलासपुर desk । NTPC सीपत में भूमि अधिग्रहण के बदले रोजगार प्रदान करने तथा वरिष्ठता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायत पर कार्रवाई में देरी का मामला अब शासन के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता भगत सिंह राठौर ने मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए माननीय मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को भी शिकायत पत्र भेजा है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इस मामले में तत्कालीन जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल के विरुद्ध शिकायत की गई है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, मंत्रालय ने 3 सितंबर 2026 को जिला बिलासपुर के कलेक्टर को शिकायत के त्वरित निराकरण के लिए आदेश जारी किया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

15 दिन में जांच रिपोर्ट के आदेश, फिर भी इंतजार

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, जिला कलेक्टर बिलासपुर ने 5 अगस्त 2026 को निष्पक्ष जांच के लिए संभागायुक्त कार्यालय को पत्र भेजा था। इसके बाद कार्यालय आयुक्त, बिलासपुर संभाग ने 24 अगस्त 2026 को चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी।

जारी आदेश में समिति को 15 दिनों के भीतर तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी उन्हें जांच रिपोर्ट और मामले में की गई कार्रवाई की स्थिति के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब जांच के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई थी, तो जांच की प्रगति और निष्कर्षों की जानकारी अब तक स्पष्ट क्यों नहीं है? क्या जांच समिति ने प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया है, या जांच अभी भी लंबित है? इन सवालों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है।

RTI में जानकारी मांगी, जवाब मिला—जांच प्रक्रियाधीन

शिकायतकर्ता भगत सिंह राठौर के अनुसार, 9 सितंबर 2026 को दिए गए कथन में भी उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत पूरी जानकारी नहीं मिलने का मुद्दा उठाया था। उनका कहना है कि जानकारी मांगने पर प्रकरण के जांच प्रक्रियाधीन होने की बात कही जा रही है।

यदि मामला अब भी जांचाधीन है, तो जांच की वर्तमान स्थिति, अब तक की गई कार्रवाई और प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं, यदि जांच पूरी हो चुकी है, तो नियमानुसार उपलब्ध कराई जा सकने वाली जानकारी शिकायतकर्ता तक पहुंचाई जानी चाहिए।

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शिकायत में भूमि अधिग्रहण के बदले रोजगार और वरिष्ठता सूची से संबंधित कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच प्रतिवेदन और संबंधित अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकेगी।

मुख्य सचिव तक शिकायत, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता भगत सिंह राठौर ने मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का हवाला देते हुए मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को भी शिकायत पत्र भेजा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, जांच प्रतिवेदन की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने और यदि जांच में किसी अधिकारी की जिम्मेदारी अथवा अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

मामले में अब प्रमुख सवाल यह है कि शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा त्वरित निराकरण के निर्देश जारी किए जाने तथा संभागायुक्त कार्यालय द्वारा जांच समिति गठित किए जाने के बाद जांच कहां तक पहुंची है। शिकायतकर्ता को जांच की प्रगति और निष्कर्षों की जानकारी कब तक मिलेगी, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।

फिलहाल, शिकायतकर्ता के आरोपों और उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर जांच में देरी का मुद्दा सामने आया है। आरोपों की पुष्टि, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और किसी संभावित अनियमितता पर अंतिम निष्कर्ष जांच अभिलेखों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के पक्ष के बाद ही निकाला जा सकता है।

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