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जरहिडीह, मिलुपारा, कोडकेल के लोगों के साथ सविता रथ ने बैठक कर मोरगा पहाड़ को बचाने का संकल्प दिलाया। मोरगा पहाड़ रियासतकाल के मिलुगढ़ अभी मिलुपारा के राजा मदन सिंह प्रथम द्वारा स्थापित किया गया है।
यह आदिवासियों के आस्था का केंद्र रहा है। जहां आज भी रियासत कालीन ढोल, नगाड़ा आदि विद्यमान हैं। वहां आज भी पहाड़ के ऊपर बने तालाब में स्नान कर बाजे गाजे के साथ पूजा की जाती है। इस पहाड़ के बारे में यह भी आदिवासियों के बीच मिथक है कि इलाके में कोई मुसीबत आने पर पहाड़ पर रखा नगाड़ा खुद बजने लगता है। यह पहाड़ स्थानीय निवासियों के आस्था का केंद्र है। लेकिन तमाम पहाड़ों की तरह अब इस पहाड़ पर भी मुसीबत आन पड़ी है।