भेजा फ्राई : सरकारी नौकरी में सहायक अभियंता, NGO के कागजों में ‘प्राइवेट जॉब’—वाह रे सचिव साहब!
PHE विभाग में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत नेतराम वर्मा का नाम NGO के पंजीयन अभिलेख में सचिव के रूप में दर्ज, जबकि उपजीविका के कॉलम में लिखा है ‘PRIVATE JOB’; पंजीयन रिकॉर्ड और सरकारी पदस्थापना के बीच अंतर ने खड़े किए सवाल।

३६ गढ़ में ‘प्रशासनिक नक्सलवाद’ किस कदर जड़ें जमा चुका है—इसका अंदाजा लगाइए ! कहीं IAS अधिकारियों से जुड़े कथित मामलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से दिव्यांगजनों और बुजुर्गों के हक पर डाका डालने के आरोप सामने आते हैं, तो कहीं एक सहायक अभियंता की सरकारी पदस्थापना और NGO के पंजीयन अभिलेखों में दर्ज ‘PRIVATE JOB’ के विवरण के बीच विरोधाभास नजर आता है। एक तरफ सरकारी व्यवस्था की जिम्मेदारी, दूसरी तरफ कागजों में अलग व्यावसायिक पहचान—आखिर इस ‘भेजा फ्राई’ का हिसाब कौन देगा?
NGO के पंजीयन अभिलेखों में Govt Job हो गया ‘PRIVATE JOB’
दरअसल, मामला छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग से जुड़ा है। रायपुर के ओसीएम चौक स्थित पुराने नलघर में संचालित विभाग में सहायक अभियंता का नाम ‘नर्मदेश्वर महादेव जन कल्याण समिति’ के पंजीयन संबंधी दस्तावेजों में भी दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी सेवा में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत व्यक्ति की उपजीविका समिति के पंजीयन अभिलेखों में ‘PRIVATE JOB’ कैसे दर्ज है ?

क्या है इस ‘भेजा फ्राई’ खेल की पूरी स्क्रिप्ट?
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, नेतराम वर्मा पिता चोवा राम वर्मा छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, रायपुर में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। वहीं, ‘नर्मदेश्वर महादेव जन कल्याण समिति’ के पंजीयन संबंधी दस्तावेजों के प्ररूप-एक में उनकी उपजीविका (Occupation) के कॉलम में स्पष्ट रूप से “PRIVATE JOB” दर्ज है। इसी समिति के अभिलेखों में उनका नाम ‘सचिव’ के पद पर भी दर्ज है।

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब संबंधित व्यक्ति शासकीय विभाग में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं, तो समिति के पंजीयन प्रपत्र में उनकी उपजीविका ‘PRIVATE JOB’ किस आधार पर दर्ज की गई? पंजीयन के समय यह विवरण किसने दिया और संबंधित अभिलेखों का सत्यापन किसने किया? क्या पंजीयन प्राधिकारी ने इस विवरण की जांच की थी? यदि की थी, तो सरकारी पदस्थापना और दर्ज उपजीविका के बीच यह अंतर कैसे रह गया?

ये महज औपचारिक सवाल नहीं हैं। पंजीयन अभिलेखों में दर्ज जानकारी की शुद्धता और उसके सत्यापन की जिम्मेदारी से जुड़े सवाल हैं, जिनका जवाब संबंधित अधिकारी और पंजीयन प्रक्रिया के जिम्मेदार पक्षों को देना चाहिए।
आचरण नियम को ताक पर रख सरकारी सेवक बना , NGO में सचिव

सरकारी सेवा में पदस्थ सहायक अभियंता का किसी समिति में सचिव के पद पर दर्ज होना और उसी समिति के पंजीयन दस्तावेजों में उनकी उपजीविका ‘PRIVATE JOB’ लिखी होना, दोनों ही बिंदु जांच की मांग करते हैं। ऐसे मामले में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के लागू प्रावधानों के संदर्भ में भी यह जांचना जरूरी है कि संबंधित अधिकारी की भूमिका सेवा नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
सवाल सीधे हैं:
- क्या संबंधित अधिकारी ने समिति में सचिव का पद संभालने के संबंध में अपने विभाग को जानकारी दी थी?
- क्या इस भूमिका के लिए किसी प्रकार की विभागीय अनुमति आवश्यक थी और, यदि थी, तो क्या वह प्राप्त की गई?
- पंजीयन प्रपत्र में ‘PRIVATE JOB’ दर्ज करने का आधार क्या था?
- पंजीयन प्राधिकारी ने संबंधित व्यक्ति की व्यावसायिक स्थिति का सत्यापन किन दस्तावेजों के आधार पर किया?
- क्या सरकारी सेवा में पदस्थ अधिकारी की जानकारी और समिति के पंजीयन अभिलेखों का आपस में मिलान किया गया था?
इन सवालों का जवाब दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड से सामने आना चाहिए। आखिर सरकारी पद पर कार्यरत व्यक्ति की व्यावसायिक पहचान के संबंध में पंजीयन अभिलेख में दर्ज विवरण की जवाबदेही किसकी है?
विभागीय जांच की मांग
यह मामला केवल पंजीयन प्रपत्र में दर्ज अंग्रेजी के दो शब्दों—‘PRIVATE JOB’—तक सीमित नहीं है। सरकारी सेवा में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत व्यक्ति की उपजीविका का समिति के पंजीयन दस्तावेजों में निजी नौकरी दर्ज होना एक गंभीर अभिलेखीय विरोधाभास है। इसकी आधिकारिक जांच होनी चाहिए।
संबंधित विभाग और पंजीयन प्राधिकारी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पंजीयन प्रपत्र में यह विवरण किस आधार पर दर्ज किया गया, इसकी जांच किसने की और समिति में सचिव के पद पर संबंधित अधिकारी की भूमिका किन नियमों के अधीन आती है। साथ ही, विभागीय रिकॉर्ड और समिति के पंजीयन दस्तावेजों का मिलान कर स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
अब मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, संबंधित अधिकारी और पंजीयन प्रक्रिया के जिम्मेदार लोगों की भूमिका निर्धारित की जाए तथा रिकॉर्ड में सामने आए विरोधाभास का आधिकारिक जवाब दिया जाए। यदि जांच में गलत विवरण, लागू सेवा नियमों के उल्लंघन या अन्य अनियमितता की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।


