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‘भूत ने लिखवाई रिपोर्ट…’ पुलिस ने मृत व्यक्ति को बना दिया गवाह, प्रकरण सुनकर इलाहाबाद हाईकोर्ट भी हैरान

‘भूत ने लिखवाई रिपोर्ट…’ पुलिस ने मृत व्यक्ति को बना दिया गवाह, प्रकरण सुनकर इलाहाबाद हाईकोर्ट भी हैरान

HIGHLIGHTS

  1. साल 2011 में हुई थी व्यक्ति की मौत
  2. 2014 में दर्ज की गई एफआईआर
  3. हाईकोर्ट में मामले को दी थी चुनौती

प्रयागराज (Prayagraj News)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में धोखाधड़ी के मामले में दर्ज हुई एफआईआर से जुड़ा हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यह प्रकरण जब हाई कोर्ट पहुंचा तो जज भी हैरान रह गए और पुलिस को एफआईआर रद्द करने का निर्देश दिए।

दरअसल, हाईकोर्ट ने पुरुषोत्तम सिंह और चार अन्य के मामले में सुनवाई की थी। इसमें पता चला कि उत्तर प्रदेश की कुशीनगर पुलिस ने जिस व्यक्ति को शिकायतकर्ता बताकर एफआईआर दर्ज की है, उसकी मौत तीन साल पहले ही हो चुकी थी। यानी पुलिस ने मृतक को ही शिकायतकर्ता बना दिया। यहां तक की पुलिस ने अपनी चार्जशीट में उस व्यक्ति को गवाह भी नामित किया।

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यह एफआईआर दर्ज होने के बाद हाईकोर्ट में इसकी वैधता को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद केस की कार्रवाई रद्द करने और एसपी कुशीनगर को जांच के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने क्‍या कहा

इस एफआईआर पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई और कहा कि ऐसा लगता है कि भूत ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि ‘केस के तथ्य से वह अवाक हैं, किस तरह पुलिस अपराध की विवेचना करती है। पुलिस ने तीन वर्ष पहले मरे आदमी का बयान दर्ज कर लिया।’ कोर्ट ने विवेचना अधिकारी की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी किए हैं।

2011 में हुई थी मौत

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि जिस व्यक्ति को शिकायतकर्ता बताकर एफआईआर दर्ज करवाई गई थी, उसकी मौत 19 दिसंबर, 2011 को चुकी थी। इसका जिक्र कुशीनगर के सीजेएम की रिपोर्ट में भी किया गया है। यह रिपोर्ट मृतक की पत्नी के बयान के आधार पर बनाई गई थी।

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क्‍या है मामला

दरअसल, मृतक व्यक्ति को शिकायकर्ताकर्ता बताकर 2014 में कोतवाली हाता में एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने 23 नवंबर, 2014 को चार्जशीट दाखिल कर दी और मृतक को गवाह भी बना दिया। याचिका में इस एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।

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