जो जितना करेगा अवनति उसे मिलता है पदोन्नति !
सहायक अभियंता से अधीक्षण अभियंता तक पहुंचे, अब मुख्य अभियंता का प्रभार; अरपा नदी के अनुपयोगी एनीकट मामले में आरोपी क्रमांक चार के रूप में दर्ज है इम्तियाज अली सिद्दीकी का नाम

रायपुर/बिलासपुर hct : इम्तियाज अली सिद्दीकी पदोन्नति प्रकरण छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया और उसके आधार पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र में अरपा नदी पर बने एनीकट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में एसीबी की एफआईआर में आरोपी क्रमांक चार के रूप में दर्ज इम्तियाज अली (आई.ए.) सिद्दीकी को पिछले कुछ वर्षों में दो पदोन्नतियां मिलीं। सहायक अभियंता से कार्यपालन अभियंता और फिर अधीक्षण अभियंता बने सिद्दीकी अब मुख्य अभियंता के प्रभार तक पहुंच चुके हैं।
एफआईआर में नाम, फिर भी पदोन्नति
अरपा एनीकट निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ईओडब्ल्यू/एसीबी), रायपुर ने वर्ष 2018 में अपराध क्रमांक 15/2018 दर्ज किया था। इस प्रकरण की एफआईआर में इम्तियाज अली सिद्दीकी का नाम आरोपी क्रमांक चार के रूप में दर्ज है। मामला एनीकट निर्माण, उस पर हुए भुगतान और बाद में सामने आई तकनीकी एवं वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा था।
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इस मामले में जांच और कार्रवाई का घटनाक्रम जारी रहने के दौरान 28 जून 2023 को सिद्दीकी को सहायक अभियंता से कार्यपालन अभियंता के पद पर पदोन्नति दी गई। इसके बाद 25 फरवरी 2026 को उन्हें कार्यपालन अभियंता से अधीक्षण अभियंता के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। वर्तमान में वे मुख्य अभियंता के पद का प्रभार संभाल रहे हैं।
पदोन्नति प्रक्रिया पर उठे सवाल
अरपा एनीकट प्रकरण में वर्ष 2023 में खात्मा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। इसके बाद विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बिलासपुर ने 8 अक्टूबर 2025 को खात्मा रिपोर्ट स्वीकार कर ली। यानी सिद्दीकी की पहली पदोन्नति एफआईआर दर्ज होने के बाद और खात्मा रिपोर्ट स्वीकार होने से पहले हुई, जबकि दूसरी पदोन्नति न्यायालय द्वारा खात्मा रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद दी गई।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर शासन और जल संसाधन विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के सतर्कता संबंधी प्रावधानों के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू प्रकरणों में संबंधित अधिकारियों की पदोन्नति के समय किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया, यह भी जांच का विषय है।
करीब 50 पत्रों के बाद भी कार्रवाई की मांग
इस प्रकरण को लेकर शासन के विभिन्न स्तरों पर करीब 50 पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है। इनमें सिद्दीकी को निलंबित करने, उनकी दोनों पदोन्नतियों की नियमसम्मतता की जांच कराने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर पदोन्नति निरस्त करने की मांग की गई है। साथ ही अरपा एनीकट मामले और उसकी जांच में प्रस्तुत खात्मा रिपोर्ट की सीबीआई से जांच कराने की मांग भी उठाई गई है।
अब सवाल यह है कि एसीबी की एफआईआर में आरोपी के रूप में दर्ज अधिकारी की पदोन्नति के दौरान विभागीय स्तर पर कौन-सी सतर्कता जांच और प्रक्रिया अपनाई गई? और क्या दोनों पदोन्नतियों के लिए निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन हुआ?
क्रमशः

