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आरोपी को पकड़ने गई छत्तीसगढ़ पुलिस, गुवाहाटी में गिरफ्तार

डिजिटल अरेस्ट केस में असम पहुंची टीम पर FIR, बिना वारंट कार्रवाई और आरोपों ने बढ़ाई किरकिरी

भ्रष्टाचार के मामलों में छत्तीसगढ़ पुलिस की खाकी पर लगे दाग अब इतने पुराने हो चुके हैं कि उन्हें छिपाने की कोशिश भी औपचारिकता भर लगती है। छत्तीसगढ़ पुलिस गुवाहाटी गिरफ्तार होने का ताजा मामला इस छवि को और गहरा करता है, क्योंकि इस बार सवाल प्रदेश से बाहर उठे हैं। यानी जो बातें अब तक अंदरखाने में कही जाती थीं, वही अब दूसरे राज्य की कार्रवाई में दर्ज हो रही हैं। राजधानी रायपुर के एक टीआई और चार जवानों का गुवाहाटी में पकड़ा जाना इस पूरे घटनाक्रम को और तीखा बना देता है।

रिश्वत के आरोप और FIR

राजधानी hct : रायपुर के एक टीआई और चार जवानों का गुवाहाटी में गिरफ्तार होना इस पूरे परिदृश्य को और ज्यादा तीखा बना देता है।दरअसल, आईटी एक्ट के तहत दर्ज डिजिटल अरेस्ट से जुड़े एक 50 लाख रुपये के ठगी मामले में कार्रवाई करने असम पहुंची छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम खुद ही कानून के घेरे में आ गई। रायपुर के टिकरापारा थाना से निकली यह टीम आरोपी को पकड़ने गुवाहाटी पहुंची थी, लेकिन गिरफ्तारी के दौरान जिस तरह की कथित बदसलूकी और रिश्वत मांगने के आरोप सामने आए, उसने पूरी कार्रवाई को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया। नतीजतन, गुवाहाटी पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया।

गुवाहाटी में गिरफ्तार रायपुर पुलिस टीम, डिजिटल अरेस्ट केस विवाद

बिना वारंट पहुंची टीम !

जानकारी के मुताबिक अजाक थाना प्रभारी रविंद्र कुमार यादव के नेतृत्व में चार जवानों की टीम जांच के सिलसिले में असम पहुंची थी। लेकिन आरोप है कि आरोपी को पकड़ने के दौरान रिश्वत लेने की कोशिश की गई, जिससे विवाद बढ़ गया और मामला स्थानीय स्तर पर तूल पकड़ने लगा। स्थिति ऐसी बनी कि दोनों राज्यों की पुलिस आमने-सामने खड़ी नजर आई। ऐसे में गुवाहाटी पुलिस ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की, जिससे यह मामला महज एक गिरफ्तारी से बढ़कर पुलिसिया आचरण की परीक्षा बन गया।

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प्रक्रिया बनाम जल्दबाजी

वहीं, पूरे घटनाक्रम का सबसे पेचीदा पहलू यह सामने आया कि छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम बिना प्रोडक्शन वारंट के ही आरोपी को रायपुर लाने की तैयारी में थी। सोमवार शाम जब टीम आरोपी के ठिकाने पर पहुंची, तो स्थानीय लोगों और आरोपी के सहयोगियों ने इसका विरोध किया। इसके बाद मामला और उलझ गया। सूत्रों की मानें तो वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार करने की यह जल्दबाजी ही पूरे विवाद की जड़ बनी। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अंतरराज्यीय कार्रवाई में समन्वय और नियम अब केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।

चार घंटे की कवायद के बाद रिहाई

इधर, हालात ऐसे बने कि रायपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला समेत अन्य अधिकारियों ने गुवाहाटी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क साधा और करीब चार घंटे की कवायद के बाद रायपुर पुलिस टीम को छोड़ा गया। लेकिन तब तक यह घटना एक उदाहरण बन चुकी थी—ऐसा उदाहरण, जिसमें कानून लागू करने वाली टीम ही कानून की कसौटी पर खड़ी नजर आई।

लेकिन सवाल कायम

अब यह पूरा मामला सिर्फ एक कार्रवाई या एक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह उस कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है, जहां ‘एक्शन’ दिखाने की जल्दबाजी में प्रक्रिया पीछे छूट जाती है। छत्तीसगढ़ में जो बातें अब तक अंदरखाने में चर्चा का विषय थीं, वे अब दूसरे राज्य की FIR में दर्ज हो रही हैं—और यही शायद इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा तंज है।

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