मिर्रीटोला में भीषण जल संकट, आधे घंटे की सप्लाई से ग्रामीण परेशान
धनोरा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पानी की गुणवत्ता पर सवाल, टूटी मुख्य पाइपलाइन से रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद होने का आरोप

गुरूर hct : बालोद जिले के गुरुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत मिर्रीटोला (पुरूर) में इन दिनों पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों और वार्डवासियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में पेयजल नहीं मिल पा रहा है। वहीं धनोरा में स्थापित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से आने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
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वार्डवासियों के अनुसार, घरों में नल के माध्यम से पानी की सप्लाई महज आधे घंटे के आसपास होती है। इतने कम समय में पर्याप्त पानी नहीं भर पाने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि पानी पीने के बाद कुछ लोगों की तबीयत भी खराब हुई है। हालांकि, पानी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों की आधिकारिक जांच की जानकारी सामने नहीं आई है।
तालाब के बोर से पानी भरने को मजबूर ग्रामीण

पेयजल की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और अन्य ग्रामीण तालाब के पास लगे बोर से पानी लाने को मजबूर बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी और रोजमर्रा की जरूरतों के बीच पानी की यह समस्या उनके लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
15-20 दिनों से मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने का आरोप

ग्रामीणों ने बताया कि पानी सप्लाई करने वाली मुख्य पाइपलाइन भी पिछले 15 से 20 दिनों से क्षतिग्रस्त पड़ी है। पाइपलाइन से लगातार पानी रिसने के कारण बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब एक ओर घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है, तो दूसरी ओर क्षतिग्रस्त पाइपलाइन से पानी की बर्बादी को रोकने के लिए समय पर मरम्मत क्यों नहीं कराई जा रही है।
सरपंच पति के हस्तक्षेप को लेकर भी नाराजगी
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की सरपंच हीरामनी साहू के पति केजू साहू पर पंचायत के कार्यों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। वार्डवासियों का कहना है कि समस्या की शिकायत करने पर कथित तौर पर उन्हें यह जवाब दिया जाता है कि “यह तुम्हारे मोहल्ले की समस्या है, तुम लोग ही बनाओ, पंचायत में इन कार्यों के लिए फंड नहीं है।” ग्रामीणों के इन आरोपों के चलते सरपंच पति की भूमिका को लेकर भी वार्डवासियों और पंचायत के निर्वाचित पंचों में नाराजगी की बात कही जा रही है।
दो साल के कार्यकाल में भी समस्या जस की तस
ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच के कार्यकाल को लगभग दो वर्ष हो चुके हैं, लेकिन पेयजल जैसी मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीण पंचायत से मांग कर रहे हैं कि क्षतिग्रस्त मुख्य पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत कराई जाए, पर्याप्त समय तक नल से पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाए और पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाए।



