Crime

H2O कैफे माना में खुलकर पिलाई जा रही शराब और गांजा !

विकास दास मानिकपुरी, संयुक्त सचिव आम आदमी पार्टी यूथ विंग जिला रायपुर ने किया पुलिस में शिकायत

अब तक तो यह खबर आम थी कि राजधानी रायपुर के होटल और ढाबों में पुलिसिया सांठगांठ में खुलकर शराब पिलाई जाती है, मगर अब शराब के साथ-साथ गांजा भी परोसे जाने का चलन आम होने लगा है। खबर है कि रायपुर के माना स्थित एक कैफ़े में शराब और गांजा पिलाए जाने की बात सामने आई है।

रायपुर hct : प्राप्त जानकारी के अनुसार विकास दास मानिकपुरी अपने दोस्त के साथ रात्रि करीब 11: 30 बजे H2O कैफे में मैगी खाने के लिए गया था। यहाँ उन्होंने देखा कि कैफे में अवैध तरीके से शराब और गांजा पिलाया जा रहा है। इस बात की जानकारी उन्होंने माना थाने के थाना प्रभारी को लिखित शिकायत भी किया है ऐसा उनके द्वारा बताया गया।

युवाओं को आकर्षक पैकेज का लालच देकर करते हैं आकर्षित

इसके पहले भी हमने विधानसभा थाना क्षेत्र स्थित U TURN नामक एक निजी रेस्टोरेंट में भी खुल्लम खुल्ला बीयर परोसे जाने की खबर का प्रसारण किया था जिसमे उल्लेख किया गया था कि राजधानी और इसके बाहरी इलाकों के लाड़-प्यार वाले नवाबों के अलावा, होटल, क्लब और बार युवाओं को आकर्षक पैकेज का लालच देकर आकर्षित करते हैं। इसके अलावा, शनिवार और रविवार को राजधानी और उसके आसपास फार्म हाउसों में डांस पार्टियां आयोजित की जाती हैं, जहां युवाओं को ड्रग्स भी परोसा जाता है।

पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर इस बन्दे को उठा तो जरूर मगर खबर हैं कि अब तक कोई कार्रवाई हुई ही नहीं है !

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एक तरफ रायपुर पुलिस अधीक्षक के निर्देश में नशा मुक्ति की दिशा में “निजात” अभियान चलाकर सभी थानेदारों को सख्त निर्देश दिया गया हैं जिसके तहत तमाम थानों में अपराध के नाम पर सिर्फ और सिर्फ गरीब तबके के नागरिकों की धर पकड़ कर न्यायालय का वक्त जाया किया जा रहा है वहीँ रसूखदारों को बगैर लायसेंस अवैध रूप से शराब और अब गांजा भी बेचने की खबर उजागर होने से “निजात” को ठेंगा दिखाया जा रहा है।

माजरा कुछ संदेहात्मक है।

इतनी कार्रवाई होने के बाद भी नशे का सामान राजधानी में इतने धड़ल्ले से बिक रहा है और होटल, कैफे में परोसा भी जा रहा है कहीं ना कहीं यह से बिक रहा नशे का सामान पुलिस विभाग की एक्स्ट्रा इनकम की तरफ संकेत तो नहीं ! नाकामी को साबित कर रहा है जब रोज इस तरह की घटना सामने आ रही है और इस पर रोक लगने के बजाय दिन-ब-दिन और नशे के कारोबारी में बढ़ोतरी देखने को रही है क्या निजात अभियान सिर्फ नाम भर का चल रहा है या फिर इसका असर नशे के कारोबारी पर नहीं पड़ रहा है देखने वाली बात यह है कि इतने कार्रवाई के बावजूद भी यह नशे का सामान बड़े ही आसानी से लोगों को मिल जाता है पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग पर यह सवालिया निशान है?

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