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मृत समाज और बेबस भाई: चार कंधे नहीं मिले तो साइकिल पर बहन का शव ले जाकर किया दाह-संस्कार

नवरंगपुर में अमानवीयता की हद; सामाजिक अनबन के चलते समाज ने फेरा मुंह, दो भाइयों ने साइकिल को बनाया सहारा

नवरंगपुर (उड़ीसा) । साइकिल पर बहन का शव : नुआखाई पांडे को पति ने त्याग दिया। अबला आकर अपने दोनों भाई के साथ रहने लगी। तबियत खराब हुई और त्यक्ता (नुआखाई पांडे) की मौत हो गयी। समाज के लोगों ने पांडे परिवार के साथ संबंध में अनबन होने का हवाला देकर शव को कंधा तक नहीं दिया। बेबस और समाज से त्यक्त उस मृत महिला को मृत समाज से त्यक्त पांडे भाइयों (टेकराम और पुरुषोत्तम) ने साइकिल के पीछे वाला स्टैंड पर ले जाकर (क्योंकि चार कंधा की जरूरत थी और हो रहा था सिर्फ दो कंधा, सो एक निर्जीव साइकिल को कंधा बनाया गया शव का दाह संस्कार किया।

साइकिल पर बहन का शव नवरंगपुर उड़ीसा सामाजिक बहिष्कार
नवरंगपुर में सामाजिक बेरुखी के बीच साइकिल के सहारे बहन का शव ले जाते दो बेबस भाई।

साइकिल पर बहन का शव

अद्भुत प्रसंग है ये। एक भाई साइकिल चला रहा है और एक भाई पीछे से अपनी बहन जो पति और मृत समाज से त्यक्त है, उसे पकड़े हुए है। यह बोझ ले जा रहे हैं, सिर्फ शव का नहीं, अपितु समाज का। इस समाज को तुरंत जलाने की जरूरत है। क्योंकि शव के सड़ने से ज्यादा घातक है इस समाज का सड़ जाना।
यह अब हो गया है हिन्दू समाज। अद्भुत माया है। कल्पना कीजिये ये अगर हमारे और आपके साथ हो जाये (भगवान न करे), तो क्या महसूस करते? आप हिन्दू होने पर गर्व कीजिये और उधर कोई (पांडे) हिन्दू होने पे शर्म कर रहा होगा।

Rishikesh Tiwari

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