Crime

अंग्रेजी का टीचर बना ठग, कमीशन लेकर ठगों के लिए खुलवाता था बैंक अकाउंट, 88 लाख की ठगी में हुई गिरफ्तारी

महिला आईटी इंजीनियर से 88 लाख की ठगी मामले में रायपुर साइबर रेंज ने बिहार के आरोपी पी. हरिकिशाेर सिंह को चेन्नई से पकड़ा था। पंकज दुबे अंग्रजी का शिक्षक भी है। खाते उपलब्ध करवाने के बदले उसे कमीशन भी मिलता था। ठगी में पुलिस ने 57 लाख रुपये अलग-अलग खातों में होल्ड करवाए हैं।

HIGHLIGHTS

  1. 88 लाख की ठगी में खाते उपलब्ध करवाने वाला शिक्षक सहित दो गिरफ्तार।
  2. आईटी इंजीनियर से शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर की गई धोखाधड़ी।
  3. खाते उपलब्ध करवाने के बदले ठग से आरोपियों को मिलता था कमीशन।

 रायपुर। शेयर ट्रेडिंग के नाम पर महिला आईटी इंजीनियर से 88 लाख की ठगी के लिए खाता उपलब्ध करने वाले दो आरोपी पंकज दुबे और निखिल शुक्ला को उत्‍तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपी मूलत: बरबसपुर दीनापुर जौनपुर उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।

इससे पूर्व रायपुर साइबर रेंज ने बिहार के आरोपी पी. हरिकिशाेर सिंह को चेन्नई से पकड़ा था। पंकज दुबे अंग्रजी का शिक्षक भी है। खाते उपलब्ध करवाने के बदले उसे कमीशन भी मिलता था। ठगी में पुलिस ने 57 लाख रुपये अलग-अलग खातों में होल्ड करवाए हैं।

जानिए कैसे हुई महिला आईटी इंजीनियर ठगी का शिकार

सेक्टर-16 बी. नोएडा, उत्तरप्रदेश निवासी रश्मि शर्मा यहां होटल क्लार्क इन तेलीबांधा में रुकी थी। वह नोएडा में टेक महिंद्रा कंपनी में आईटी इंजीनियर हैं। वे रायपुर में कंपनी के काम से आई हुई थी। इस बीच गूगल में सर्च करने के दौरान उन्हें एवेडेंस स्पार्क ट्रेडिंग प्रोग्राम का विज्ञापन दिखा।

इसके बाद रश्मि ने उसमें दिए गए संपर्क नंबर पर फाेन किया। दूसरी ओर से अंजली शर्मा नाम की युवती ने फोन उठाया। इसके बाद उन्हें वाट्सएप ग्रुप इंडिया स्टाक इंवेस्टमेंट एकेडमी-002 में जोड़ दिया गया। ग्रुप में मेंटर नरेश राठी ने उन्हें शेयर ट्रेडिंग करने पर भारी मुनाफा कमाने का झांसा दिया। महिला उसकी बातों में आ गई।

महिला ने आठ जुलाई से लेकर सात अगस्त तक अलग-अलग बैंक खातों में कुल 88 लाख रुपये जमा किया। इतनी राशि जमा करने के बाद शेयर में उन्हें लाभ नहीं मिला और न ही आरोपियों ने पैसे लौटाए। बाद में उन्हें ग्रुप से अलग कर दिया। इसकी शिकायत महिला ने रायपुर रेंज साइबर थाना में की। रिपोर्ट के बाद साइबर की टीम ने पतासाजी शुरू की। मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद आरोपी के बारे में पता चला।

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