Chhattisgarh

लाल ईंटो के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट ने लगा रखा है प्रतिबंध, फिर भी बेधड़क जारी है निर्माण।

गरियाबंद। उपरोक्त तस्वीरें जिले में चल रहे लाल ईंटो के निर्माण की है, जिले के छुरा ब्लॉक के ग्राम नांगझर सहित अन्य विकासखंडों; साथ ही धमतरी जिले से लगे सरहदी गांवों में लाल ईंटो का निर्माण बेधड़क चल रहा है।

समय-समय पर इन ईंटो को पकाने के लिए जंगल के हरे भरे इमारती व फलदायी वृक्षों को काटने की सूचनाएं भी प्राप्त होती रहती है, चूंकि जिला वनों से घिरा हुआ है ऐसे में आसानी से जंगल के पेड़ों को लाकर ईंट भट्ठों में झोंक दिया जाता है।

वर्षो पहले ही पर्यावरण संरक्षण के लिए लाल ईंटो के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है, किन्तु इस प्रतिबंध का सम्बन्धितों पर कोई असर नहीं हो रहा, अधिकारियों को जब इस तरह के मामले की सूचना दी जाती है, तब अधिकारी बड़ी मासूमियत से जानकारी से इनकार करते हुए कहते हैं कि; आपके माध्यम से सूचना मिल रही है, कार्यवाही की जाएगी।

सभी जानते हैं की इनकी कार्यवाही से पिछले पांच वर्षों में लाल ईंटो के अवैध निर्माण पर ना कोई अंकुश लगा है और ना लगेगा, आम नागरिक इस तरह के मामलों में खुलेआम मिलीभगत का आरोप लगाते हैं।

क्या होता है नुकसान
लाल ईंटो के निर्माण से पर्यावरण को बेहद गंभीर क्षति होती है, भूमि पर मौजूद उर्वरक मृदा तत्व नष्ट होते हैं, वायु मंडल में प्रदूषण फैलता है, इसके अतिरिक्त जंगल के हरे भरे वृक्षो का नुकसान होता है। इन्ही कारणों से शासकीय निर्माण कार्यो में लाल ईंटो के बजाय फ्लाई ऐश ईंटो से निर्माण किया जाना प्रावधानित किया गया है।

इस वर्ग को छूट, ये है नियम

लाल ईंट निर्माण के लिए , कुम्हार ,अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए विशेष रियायत दी गई है, इस वर्ग लोगों के लिए 50 हजार तक लाल ईंट निर्माण के लिए किसी भी तरह की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, किन्तु इस वर्ग की आड़ में दूसरे वर्ग के लोग लाल ईंटो का निर्माण, अपना कारोबार संचालित करने के लिए करते हैं जिससे पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाने के साथ-साथ ऐसे कारोबार से शासन को राजस्व की हानि होती है।

https://chat.whatsapp.com/IYo6XeRExzY3GE5iQ6LdGv

Back to top button

You cannot copy content of this page