Chhattisgarh

राजिम फिंगेश्वर क्षेत्र में शराब की अवैध बिक्री : आबकारी विभाग उदासीन

यहां सरकार की आहता पॉलिसी हो गई फ़ेल , आंखों देखी की अनदेखी करना कोई इनसे सीखे

गरियाबंद (किरीट भाई ठक्कर) hct : जिले के राजिम आबकारी सर्कल में आबकारी एक्ट की खुल्लमखुल्ला धज्जियां उड़ाई जा रही है। राजिम और फिंगेश्वर क्षेत्र के छोटे छोटे गांव – खेड़े में कुछ ढाबे और चखना सेंटर, सिर्फ और सिर्फ शराब परोसने और शराब की अवैध बिक्री के लिये खोले गये है। सूत्र बताते हैं कि सारा खेल विभागीय संरक्षण में चल रहा है। राजिम फिंगेश्वर क्षेत्र के ग्राम बोरसी कुंडेल जोगीडीपा चरौदा बेलर रक्सा फूलझर में देशी अंग्रेजी सहित कच्ची महुआ शराब की अवैध बिक्री धड़ल्ले से चल रही है। आपको बता दें कि पिछले अक्टूबर माह में सोशल मीडिया पर फिंगेश्वर शराब दुकान के पिछले दरवाजे से कोचियों को शराब दिये जाने का वीडियो वायरल हुआ था।

सरकार की आहता पॉलिसी फ़ेल

इसी वर्ष अप्रैल माह से सरकार ने राज्य में आहता पॉलिसी लागू की है, जिसका मकसद मदिरा प्रेमियों को मदिरापान के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने के अलावा राजस्व बढ़ाना भी है। किंतु राजिम सर्कल के राजिम, फिंगेश्वर, बासीन में आहते बंद होने की सूचना मिली है। इनकी जगह विभागीय संरक्षण में अनेक चखना दुकान संचालित हो रही है, जिससे लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है।

बिक्री के आंकड़े चौकाने वाले

एक जानकारी के अनुसार राजिम फिंगेश्वर क्षेत्र में दीवाली त्योहार के मौके पर एक सप्ताह में ही 5 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की शराब बिक्री हुई थी। इनमें राजिम की देशी अंग्रेजी दोनों शराब दुकानों में सबसे अधिक 2,84,93000 रुपयों की शराब बिक्री हुई थी। इसी तरह फिंगेश्वर में 1,10,78,800 रु बासीन में 1,01,56930 रु और छुरा में लगभग 70 लाख रुपये की देशी विदेशी मदिरा की बिक्री हुई थी।

स्थानीय प्रशासन बन बैठा है गांधारी 

गांव में ही एक जगह रहने के कारण कोई भी सामने आकर शिकायत करने से कतराता है व नाम नहीं छापने की शर्त रखकर अपनी व्यथा बताते हैं। नगर के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम जामगांव, भेंडरी, कोसमखुटा में विगत महीनों से अवैध शराब का कारोबार बेख़ौफ़ जारी है। सुबह से देर रात तक प्रमुख मार्ग पर शराबियों का जमावाड़ा लगा रहता है। बता दें कि उक्त मार्ग पर कहीं भी आप एकाएक वाहन किनारे खड़ा कर कुछ देर रुके तो अवैध कारोबारी आपके करीब आकर पूछेंगे कि कितना पौवा चाहिए। इतना सब होने के बावजूद स्थानीय प्रशासनिक अफसर आंख मूंदे हुए हैं।

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