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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के वादा खिलाफी और आईजी कल्लूरी को बर्खास्त कर जेल भेजे जाने की मांग को लेकर अनशनरत हुए पत्रकार कमल शुक्ला।

रायपुर। बस्तर में अपनी पदस्थता के दौरान देश-दुनिया मे छत्तीसगढ़ की छवि को धूमिल करने और निर्दोष आदिवासियों को नक्सली बताकर जान से मारने और जेल में ठूंसने को लेकर आतंक का पर्याय बन चुके आई जी शिवराम प्रसाद कल्लूरी को जिसे भाजपा सरकार ने बस्तर से हटाकर पुलिस मुख्यालय में पदस्थ कर दिया था।
        सत्ता परिवर्तन के बाद बदलाव की बयार में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने उसे “ईओडब्ल्यू और एसीबी” जैसे महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापना कर उसे किस मजबूरी अथवा ईमानदारी की सौगात भूपेश बघेल ने दिया है ! बस्तर के साथ वे सभी मानवाधिकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार जगत हतप्रभ हैं।
हत्यारे, दुर्दांत अपराधी आईजी कल्लूरी को बर्खास्त कर जेल भेजे जाने अथवा खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की इस्तीफे की मांग को लेकर वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला आज से मौन आमरण अनशन पर बूढ़ापारा धरना स्थल पर अनशनरत हैं।
जिस आताताई पुलिस अधिकारी आईजी कल्लूरी के आतंक और दहशत को लेकर बस्तर सहित समूचे प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को सत्तारूढ़ किया उसके मुखिया भूपेश बघेल ने बस्तर के साथ प्रदेश भर के पत्रकारों से भी वादा खिलाफी किया है। चुनाव से पूर्व कांग्रेस के दिग्गजों ने प्रदेश के पत्रकारों, मानवाधिकार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को यह विश्वास दिलाया था कि, कांग्रेस के सत्ता में आते ही दुर्दांत पुलिस अधिकारी कल्लूरी के खिलाफ जांच कमेटी बनाई जाएगी और उसे जेल भेजा जाएगा तथा प्रदेश में “पत्रकार सुरक्षा कानून” लागू किया जाएगा, जिसे विधानसभा के पहले सत्र में ही लाया जाएगा, ऐसा न करके आईजी कल्लूरी को ईओडब्लू और एसीबी जैसे महत्वपूर्ण पद देकर बस्तर और प्रदेश के पत्रकारों के साथ विश्वासघात किया है।

         हत्यारे, दुर्दांत अपराधी आईजी कल्लूरी को बर्खास्त कर जेल भेजे जाने अथवा खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की इस्तीफे की मांग को लेकर वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला आज (22 जनवरी) से आमरण अनशन पर बूढ़ापारा धरना स्थल पर अनशनरत हैं, जिनके समर्थन में सहयोगी पत्रकार साथी दिनेश सोनी, गोपाल पाठक, विश्वनाथ राजू, विद्यानंद ठाकुर जी धरना स्थल पर उपस्थित हैं।

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