Chhattisgarh

Teachers Day पर मिलिए डॉ अरविंद नेरल से, जिंदा रहते शिक्षा देकर बना रहे डॉक्टर, मृत्यु के बाद भी देंगे ज्ञान

जब बात शिक्षा और मानवता के प्रति समर्पण की होती है, तो कुछ नाम अपने आप ही चमक उठते हैं। डा. अरविंद नेरल, रायपुर मेडिकल कॉलेज के पैथालॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष, ऐसे ही एक अद्वितीय शिक्षक हैं जिनकी कहानी न केवल चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि मानवता के प्रति उनके समर्पण की एक प्रेरक मिसाल है।

रायपुर। जीवन के 41 साल चिकित्सा शिक्षा में पूरे कर चुके हैं, समर्पण इतना की मृत्यु के बाद भी छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए देहदान का संकल्प लिया है। यह संकल्प रायपुर मेडिकल कॉलेज के पैथालॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अरविंद नेरल का है। उन्होंने वर्ष 2015 में अपनी शादी की 25वीं सालगिरह पर देहदान का संकल्प फार्म भरा था।

डा. नेरल रायपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस किया और यहीं वो पैथालॉजी विभाग के प्राध्यापक बने। वे ऐसे चिकित्सा शिक्षक हैं जो 1984 से लगातार मेडिकल कॉलेज में पढ़ा रहे हैं। अभी तक दो हजार से ज्यादा छात्रों को शिक्षा दे चुके हैं। डॉक्टर के पेशे के अलावा दूसरों की जान बचाने के लिए अब तक 124 बार रक्तदान किया है।

देहदान में छात्रों का हित

पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले एबीबीएस के स्टूडेंट दान में मिले शवों के माध्यम से मानव शरीर और अंगों के बारे में स्टडी करते हैं। देहदान में मिले शव के जरिए ही मेडिकल स्टूडेंट को शरीर के बनावट की वास्तविक जानकारी हासिल होती है। मेडिकल के छात्र-छात्राएं शरीर के अंगों के काम करने का तरीका जानकर बेहतर डॉक्टर बन पाते हैं।

इसलिए लिया यह फैसला

डा. अरविंद नेरल ने मेडिकल कॉलेज कार्यकाल के दौरान देखा कि छात्रों को प्रैक्टिकल के लिए मानव देह नहीं मिल रहा है। इससे छात्रों को समस्या होती थी। अभी समाजिक बदलाव के कारण लोग देहदान करने में रूची दिखा रहे हैं। उन्होंने भी छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए देहदान का संकल्प पत्र भरा है। वो दूसरों को भी देहदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अब तक पांच लोगों का देहदान करवा चुके हैं।

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