Chhattisgarh

शिव मंदिर से तांबे की जलहरी चोरी, पुलिस का बहाना – “चोर नाबालिक है”

“अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता ! चोरी के आरोपी को नाबालिक बता कर पुलिस ने धो डाले हाथ”

मगरलोड (धमतरी) hct : विकासखंड मुख्यालय मगरलोड के गायत्री मंदिर परिसर में भगवान शिवलिंग से तांबे की जलहरी चोरी हुए तीन दिन हो गए, लेकिन पुलिस अब तक चोर को पकड़ने में असफल रही है। मंदिर समिति ने सीसीटीवी फुटेज तक उपलब्ध कराए, फिर भी थाना मगरलोड हाथ पर हाथ धरे बैठा है। चोरी की घटना को तीन दिन गुजरने के बाद जब मीडिया ने इसे जोर-शोर से उठाया तो लगा कि पुलिस हरकत में आएगी। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से समाचार छपने के बाद भी थाना मगरलोड में कोई हलचल नहीं दिखी।

पुलिस का बहाना और कानून की सच्चाई

थाना प्रभारी लक्ष्मीकांत शुक्ला का कहना है कि चोरी करने वाला नाबालिक है, इसलिए कार्रवाई नहीं हो पा रही। लेकिन किशोर न्याय अधिनियम 2015 साफ करता है कि नाबालिक अपराधी पर भी केस दर्ज होगा और उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश किया जाएगा। सवाल यह है कि जब कानून रास्ता दिखा रहा है तो पुलिस किस मजबूरी में आंखें मूंदे बैठी है?

कबाड़ी पर ढिलाई और शक की सुई

चोरी के सामान का खरीदार कबाड़ी ही होता है और धारा 411 IPC के तहत चोरी की संपत्ति को खरीदना या छिपाना अपराध है। लेकिन मगरलोड पुलिस ने यहां भी सिर्फ “प्रतिबंधात्मक कार्यवाही” का जुमला उछाल दिया। अब जनता पूछ रही है — “आखिर कबाड़ी पर केस दर्ज करने में इतनी हिचक क्यों? कहीं ऐसा तो नहीं कि कबाड़ से ही कोई कमीशन का जुगाड़ चलता हो?” यह तंज नगर की गलियों से लेकर चौक-चौराहों तक गूंज रहा है।

समाचार का असर शून्य!

जहाँ सामान्यत: खबरें छपने के बाद पुलिस सक्रिय दिखने लगती है, वहीं इस मामले में तो मानो धमतरी पुलिस ने प्रेस की आवाज़ को भी ठेंगा दिखा दिया। लोग कह रहे हैं – “अगर समाचार छपने के बाद भी कार्रवाई न हो, तो समझ लीजिए थाना में आस्था नहीं, किसी और का दबदबा चलता है।”

संगठनों का आक्रोश

गायत्री प्रज्ञा पीठ के पदाधिकारी मेन सिंह हिरवानी ने कहा कि श्रद्धालु आहत हैं और यदि पुलिस ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन किया जाएगा। बजरंग दल के रवि साहू ने कहा कि “हिंदू धार्मिक स्थलों को टारगेट करने वालों पर अगर शिकंजा नहीं कसा गया तो बजरंग दल सड़क पर उतरेगा।”

जनता की आवाज़ बनाम पुलिस का रवैया

स्थानीय लोगों के मन में लगातार सवाल उठ रहे हैं —

  • क्या नाबालिक का नाम लेकर अपराधियों को बचाने की नई परंपरा शुरू हो चुकी है?
  • कबाड़ी पर धारा 411 के बावजूद ठोस केस क्यों नहीं दर्ज हो रहा?
    लेकिन पुलिस के रुख को देखकर ऐसा लगता है मानो उनका सिद्धांत यही हो — “अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता।”
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