Chhattisgarh
सहकारी समतियों के पुनर्गठन की कवायद तेज।


अब तक संचालित सोसायटियों का ऋण व्यवसाय व सदस्यों का दायरा नियमों के मुताबिक कई जगह ज्यादा है। फिलहाल शासन ने पुनर्गठन की कवायद तेजकर दी है। इस बाबत बीते 25 जुलाई को राजपत्र में प्रकाशन भी हो चुका है।
माना जा रहा है कि सत्ताधारी पार्टी संचालक मंडल में इसी रास्ते पहुंच सकती है। वैसे जिले की ज्यादातर सोसायटियों में अब तक भाजपा समर्थित लोगों का कब्जा रहा है। यही वजह है कि कार्यकाल के तीन साल बचे होने के बावजूद समितियों को भंग करने का विरोध हो रहा है। कई निर्वाचित प्रतिनिधि न्यायालय जाने की तैयारी में है। उधर शासन भी उच्च न्यायालय में कैविएट लगाने जा रहा है , ताकि इस पर किसी तरह की रोक न लग सके।You cannot copy content of this page