शाला अनुदान और मध्यान्ह भोजन को खाकर पचा गए बड़े गुरूजी
पूर्व में भी हो चुका है शर्मसार कर देने वाली हरकत।

*अमित मंडावी
गुरुर (बालोद) hct : गुरुर विकास खण्ड के शिक्षा विभाग में विगत कुछ वर्षों से एक से बढ़कर एक हैरत अंगेज कारनामें देखने और सुनने को मिल रहा है। इस कड़ी में शिक्षा विभाग भी खूब नाम कमा रहा है।
हमारे समाज में शिक्षकों का एक अलग दर्जा है जिसके चलते पुरातनकाल में तो स्वयं भगवान को गुरु से श्रेष्ठ बताया और पूजा जाता रहा है, जिसके अनेक उदाहरण देखने को मिल जाएंगे। गुरु की महिमा अपरंपार है। जहां कबीर दास जी ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए लिखे हैं कि –
गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।
वहीं गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य को बिना शिष्य माने गुरु दक्षिणा में उसका अंगूठा ले लिया। ये कैसी परम्परा है…!
उपरोक्त तो हुई पुरातनकालीन तथ्य मगर इस कलयुग में भी गुरु की परम्परा से वाकिफ होने का वक्त आ गया है। आधुनिक काल (कलयुग) में गुरु की महिमा किसी से छिपी नहीं है। शिक्षकों के प्रति आम लोगों का भरोसा व सम्मान में कमी कभी देखने को नहीं मिली। बावजूद इसके आए दिन कभी किसी स्कूल में किसी गुरूजी ने अपनी ही छात्रा को …या फिर किसी दलित विद्यार्थी को मार मार के अधमरा कर देने की खबर सुर्ख़ियों में रहती है।
पहले भी हो चुके हैं कुछ ऐसे भी कारनामें
बता दें कि कुछ इसी तरह के मामला बालोद जिला के गुरुर जनपद के तहत प्रकाश में सामने आया है। विगत वर्ष एक अय्याश किस्म के एक शिक्षक के द्वारा कुछ स्कूली बच्चियों को उनके पालकों के बगैर लिखित सहमति के पिकनिक घुमाने के बहाने उनका हाथ पकड़ कर अपने इश्क का इजहार करने का सनसनी खेज मामले ने खूब बवाल काटा था, तो उसी विद्यालय के एक शिक्षक को एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने एवं उनके नोटबुक में रुपए रखने के चलते जेल की हवा भी खानी पड़ी थी।
अनुदान राशि को नियम विपरीत निजी खाता में ट्रांसफर

प्रधान पाठक
अब एक बार फिर प्राथमिक विद्यालय रमतरा में पदस्थ प्रधान पाठक दीनबंधु ठाकुर के द्वारा भ्रष्टाचार का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए शाला विकास के लिए शासन से प्राप्त अनुदान राशि को नियम विपरीत अपने निजी बैंक खाता में ट्रांसफर कर गबन करने एवं पोषण आहार के रूप में मध्यान्ह भोजन में बच्चों को मिलने वाली पापड़ एवं आचार को भी डकार जाने की जानकारी मिली है।
हो सकता है आपराधिक प्रकरण
मामले में ब्लाक शिक्षा अधिकारी गुरुर, ललित चंद्राकर ने बताया कि शाला अनुदान की राशि सहित अन्य मदों से प्राप्त राशि को सिर्फ वेंडर पद्धति से ही शाला प्रबंधन समिति की अनुशंसा एवं प्रस्ताव के आधार पर ही व्यय किया जा सकता है। यदि किसी भी शिक्षक के द्वारा उक्त राशि को अपने निजी बैंक खाता में ट्रांसफर करता है तो ऐसा कृत्य भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है तथा उनके खिलाफ अपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो सकता है।

