Ad space

बिलासपुर (hct)। गुरुवार को पुलिस महानिदेशक हाई कोर्ट में उपस्थित होकर महाधिवक्ता कार्यालय के लॉ अफसर के जरिए शपथ पत्र पेश करते हुए सिविल लाइन पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के लिए माफी मांगी साथ ही उन्होंने कोर्ट को आश्वासन भी दिलाया कि, आगे से ऐसी गलती नहीं होगी। इसके बाद भी कोर्ट की नाराजगी दूर नहीं हुई।

पुलिस महानिदेशक और पुलिस अधीक्षक को जमकर फटकार लगाई। नियम कानून का गंभीरता के साथ पालन करने की हिदायत दी। इसके साथ ही अवमानना याचिका को हाई कोर्ट ने निराकृत कर दिया।

स्टेट बार कौंसिल चुनाव के बाद मतगणना से ठीक पहले मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ और टेंपरिंग को लेकर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों ने सिविल लाइन थाने में स्टेट बार कौंसिल की तत्कालीन सचिव मल्लिका बल व कौंसिल के सदस्य भरत लोनिया के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराया था। इसी बीच हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। हाई कोर्ट ने स्टेट बार कौंसिल चुनाव प्राधिकरण में मामले की सुनवाई के निर्देश दिए।

सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिकाकर्ताओं को प्राधिकरण जाने कहा था। चुनाव प्राधिकरण ने मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ और टेंपरिंग के आरोपों को नकराते हुए अपील को खारिज कर दिया था। पांच साल बाद अचानक सिविल लाइन पुलिस ने फाइल खोली और कौंसिल की पूर्व सचिव बल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि निचली अदालत से उनको जमानत मिल गई है।

लोनिया ने दायर की थी अवमानना याचिका

सिविल लाइन पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए कौंसिल के सदस्य भरत लोनिया ने अवमानना याचिका दायर की थी। याचिका में इस बात का जिक्र किया था कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया था कि इस मामले में दखल नहीं देंगे। सिविल लाइन पुलिस ने न्यायालय के निर्देशों का अवमानना की है। याचिकाकर्ता ने पुलिस महानिदेशक,पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज,पुलिस अधीक्षक बिलासपुर व सिविल लाइन थाना प्रभारी परिवेश तिवारी को पक्षकार बनाया था।

गुरुवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत मिश्रा की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट के निर्देश पर डीजीपी,आइजी, एसपी व सिविल लाइन थाना प्रभारी कोर्ट में मौजूद थे।

Join us our Whatsapp group

https://chat.whatsapp.com/JxPycU2Y8e80e5eAjsfBot

ad space

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here