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रियाबंद (hct)। शनिवार 6 जून रात्रि 9 बजे तक रायपुर संभाग के कमिश्नर जी आर चुरेंद्र जिला कार्यालय में अधिकारी कर्मचारियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ले रहे थे, साथ ही अधिकारियों कर्मचारियों को निर्देश दे रहे थे कि सभी क़वारेन्टीन सेंटरों में मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी और शौचालय अनिवार्य रूप से उपलब्ध हो, यहां साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। क्वॉरेंटाइन सेंटर के माहौल को इस तरह बनाया जाए कि ठहरे हुए लोगों को ये उनका अपना घर लगे। किन्तु अफसोस की इसी 6 जून शनिवार रविवार की दरमियानी रात जिले के गोहरापदर क्वारन्टीन सेंटर में एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

हालांकि युवक की आत्महत्या के कारणों का पता अब तक नहीं चल पाया है किंतु सवाल तो खड़े होते हैं की अधिकारियों की इन घमासान बैठकों के नतीजे आखिर क्या होते हैं ? राज्य शासन और वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिये गए दिशा निर्देश हवा में काफूर क्यों हो जाते हैं।

क्वारन्टीन सेंटरों की बदइंतजामी प्रारम्भ से ही अर्थात जब कलेक्टर श्याम धावड़े थे तब से ही सामने आ रही है। तत्समय भी जब देवभोग ब्लॉक के सुपेबेड़ा क्वारन्टीन सेंटर से जब एक युवक ने मूलभूत सुविधाओं के लिए आवाज उठाई थी तो उसे देवभोग जनपद अधिकारी से गंदी और भद्दी गालियां सुनना पड़ा था। धरनीधोड़ा क्वारन्टीन सेंटर में प्रसूता की मौत का मामला अब भी सुर्खियों में है।

वैसे शनिवार रात 9 बजे तक संभागीय कमिश्नर जी आर चुरेन्द्र की बैठक में कमिश्नर साहब ने अधिकारियों कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हुये कहा है कि हम सबको राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी, राष्ट्र और समाज को अग्रणी पंक्ति में रखते हुए शासन के दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्य करने की आदत डालनी होगी। उन्होंने अधिकारियों कर्मचारियों को ” न मैं आराम करूँगा न आराम करने दूंगा, के मूलमंत्र के साथ टीम भावना, समय सीमा और लक्ष्य के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

क्वारन्टीन हुये लोगो के बीच योगा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य मनोरंजक कार्यक्रम भी स्थानीय समिति के माध्यम से कराने के निर्देश कमिश्नर ने दिये हैं। बैठक में कलेक्टर छतर सिंह डेहरे, जिला पंचायत के सीईओ विनय लंगेह, वनमण्डलाधिकारी मयंक अग्रवाल एवं जिला अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एसडीम, तहसीलदार, जनपद सीईओ व सभी जनपद स्तरीय अधिकारी भी जुड़े थे ।
श्री चुरेंद्र ने ग्रामीण क्षेत्र में मास्क को अनिवार्य रूप से पहनने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिये । प्रवासी मजदूरों की कुशलता के आधार पर अलग-अलग सूची बनाने कहा ताकि उनके कौशल के अनुरूप उन्हें काम दिलाया जा सके।

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