Chhattisgarh

“निजात” के आड़ में, धारा 36(च) बना अवैध कमाई का जरिया..!

चूँकि राजधानी में अब चहुंओर ‘संतोष’ व्याप्त है, क्योंकि जैसे ही लाल नीली बत्ती वाली गाड़ी “साय-साय” करते हुए किसी भट्ठी के पास से गुजरती है और जब उसमें से दो चार बलमा सिपहिया लट्ठ लेकर बेचारे मदिराप्रेमी पर ऐसे टूट पड़ते हैं जैसे अभी अभी उन दुष्टों ने किसी आम शरीफजादों की माँ-बहन धर दी हो या फिर वो अर्बन नक्सली हो जो शहर में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फ़िराक में दारू भट्ठी के पास रेकी कर रहा हो।

मुखबिरों के सहारे चल रहा छग पुलिस का क्रियाकलाप… !

रायपुर hct : राजधानी रायपुर में जब से आईपीएस संतोष सिंह ने कार्यभार सम्हाला है तमाम थानेदारों एवं मातहतों को सिर्फ मदिराप्रेमी ही झूमते नजर आ रहे हैं ! क्योंकि अभी विष्णु देव का सुदर्शन इन्हीं मन्दहा लोगों के जेब कुतरने में सांय-सांय लगा है। ऐसे में व्यसन मुक्ति के ठेकेदार संतोष भला संतुष्ट कैसे बैठे सो कप्तान साहब ने फरमान जारी कर दिया कि शहर में अगर कोई भी झूमता नजर आए धर लाओ कम्बख्तों को और लगा दो आबकारी अधिनियम की धारा 36 (च)LCG

क्या है धारा 36 (च) :

आबकारी अधिनियम में धारा 36 (च) के तहत खुले में मद्यपान करने (शराब पीने) वालों के खिलाफ, 1 हजार से 5 हजार रुपए तक जुर्माना हो सकता है।राशि जमा नहीं करने पर 1 महीने कैद की सजा हो सकती है। अतः साहब ने संभवतः इसी उद्देश्य से गरियाबंद जिला के ‘जुगाड़’ का नया रास्ता अख्तियार किया है; जिससे विष्णुप्रिया लक्ष्मी की शीघ्रता से कृपा बरसती रहे।

पेश-ए-खिदमत है हाल-ए-थाना ‘पुरानी बस्ती’

राजधानी रायपुर में ही 32 थाने है यदि अन्य को छोड़ दिया जाए तो उसमें से मात्र एक पुरानी बस्ती थाना का ही हमने जब ऑनलाइन (online) एफआईआर खंगाला, तो पाया कि इस थाना में अपराध तो जैसे विष्णु जी की शैय्या पर चिरनिंद्रा में लीन हो चुका है। समूचा वर्दीधारियों की नजर में सिवाय बेवड़ों को पकड़ने के अलावा कोई काम ही नहीं ! भले ही न्यायालय की अवहेलना हो जाए मगर बचेगा तो एक भी बेवड़ा नहीं की तर्ज पर कार्रवाई जारी आहे…

मार्च 2024 से लेकर 14 अप्रेल 2024 तक यदि तमाम थानों का रिकार्ड देखा जाए तो सर्वाधिक मामले सिर्फ और सिर्फ धारा 36 (च) के ही सामने आएँगे। यदि इस बात से आप संतुष्ट ना हों तो हमारे इस समाचार में एक ऑनलाइन एफआईआर का एक स्क्रीनशॉट संलग्न है जिसे महज स्पर्श कर लेने मात्र से ही आप citizen portal पर जाकर आवलोकन कर सकते हैं।

इसी दरमियान जब हर फेरी में ये बलमा सिपहिया, दो चार मदिराप्रेमियों को धर-पकड़कर मारपीट करते हुए जानवरों की तरह गाड़ी में ठूंसते है तो दहशतज़दा बेचारा नशेड़ी की नशा ही काफूर हो जाता है और मारे डर के पीसीआर (PCR) में ही सौदेबाजी करने लगता है।

जेल जाने अथवा रात भर थाने में बेकसूर बैठाए जाने की जिल्लत से हजार पांच सौ रूपए में मामला सेट करने लगता है। मगर जब कोई तोंद वाला जिसके कंधे पर अंधेरे में सितारा जगमाता हो उसके लिए हजार पांच सौ तौहीन की बात होती है, और फिर इसी उंहापोह में गाड़ी थाना पहुँच जाती है, जहाँ बात बनी तो ठीक अन्यथा किया जाता है मामला कायम दफा 36 (च)LCG

बेवड़ा पकड़ो अभियान के आड़े न्यायालय की अवहेलना

बता दें कि दिनांक 24 / 01 / 2024 को रायपुर जिला एवं सत्र न्यायालय ने थाना पुरानी बस्ती पुलिस को 420, 468 और 471 के आरोपी, समाज कल्याण विभाग के शातिर पंकज वर्मा के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना करने हेतु निर्देशित किया हो जिस पर थाना प्रभारी के कान में जूं भी ना रेंगती हो; ऐसे थानेदार को, कप्तान साहब के निर्देश से “बेवड़ा पकड़ो अभियान” चलाकर राजधानी को बेवडाओं से निजात जो दिलानी है। इसके लिए भले ही कोर्ट का आदेश जाए रद्दी टोकरी में।

आगामी खबर : 420 पंकज वर्मा के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़

शातिर पंकज वर्मा पर आखिर क्यों है पुरानी बस्ती पुलिस मेहरबान और क्या कारण है कि थानेदार ने आवेदक को दो टूक यह कहते हुए जवाब दे दिया कि चाहे जहाँ चले जाओ जिससे शिकायत करनी हो करो लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करूँगा। मामला दक्षिण विधानसभा का और थाना भी इसी क्षेत्र से सम्बंधित कहीं कुछ आम-ओ-खास तो नहीं। सनसनीखेज खबर के लिए इंतजार करें और बने रहें हमारे साथ …

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Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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