Chhattisgarh

रोजगार सहायक का कमाल, पत्नी को कर दिया मालामाल !

मनरेगा (MNREGA) अर्थात महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम भारत में लागू एक रोजगार गारंटी योजना है, जिसे 02 अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर 2009 को विधान द्वारा अधिनियमित किया गया। इस योजना के तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराती है। इस कार्य को सम्पादित कराने हेतु सरकार ने पंचायत स्तर पर ग्राम के ही एक पढ़े लिखे बेरोजगार युवक/युवती को मासिक 6000/- मानदेय आधारित “रोजगार सहायक” के पद पर नौकरी दे रखा है …

गुरुर (बालोद) hct : सरकार ने मनरेगा के तहत जिस पढ़े – लिखे बेरोजगार को रोजगार सहायक के पद पर नौकरी देकर उसे बेरोजगारी मुक्त करने का प्रयास किया है, वही पढ़ा – लिखा बेरोजगार जब शातिर चाल चलने लगे तो समझ लेना चाहिए कि बंठाधार निश्चित है। कुछ ऐसा ही मामला जनपद पंचायत गुरुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत धनोरा में पदस्थ रोजगार सहायक सुरेंद्र गिरी गोस्वामी की चालबाजी सामने आई है।

जब सुरेंद्र के बदले सुर, फिर गड़े मुर्दे ने साँस लेना शुरू कर दिया।

दरअसल मामला यह है कि ग्राम पंचायत धनोरा के रोजगार सहायक सुरेंद्र गिरी गोस्वामी के द्वारा पंचायत में बैठे कुछ प्रतिनिधियों से साठगांठ कर एक बड़े घोटाले को अंजाम दे चुका है। मामले की जानकारी तो ग्रामीणों को पहले से ही थी, लेकिन “नंगा से खुदा डरे” वाली कहावत के चलते ग्रामीणों ने सुरेंद्र के काले कारनामों का कफ़न – दफ़न कर दिया था। मामले से तो पर्दा तब हटा जब कानाफूसी होते – होते बात मीडियाकर्मियों तक पहुंची। मीडियाकर्मियों ने हकीकत जानने जब रोजगार सहायक से सवाल तलब करने लगे तब सुरेंद्र के सुर बदल गए और फिर इसी चक्कर में गड़े मुर्दे ने साँस लेना शुरू कर दिया।

फर्जी हाजरी भरकर शासन को पहुंचाया आर्थिक नुकसान

ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि कैसे रोजगार सहायक सुरेंद्र गिरी गोस्वामी ने अपनी पत्नी का दीपाली गोस्वामी का नाम मस्टररोल में घुसेड़कर उसके बैंक अकॉउंट में हजारों रुपये ट्रांसफर कर पंचायत और दीगर हितग्राहियों के हक़ पर डाका डाला है। ग्रामीणों के मुताबिक घपलेबाजी का यह सिलसिला विगत 5 साल से गुपचुप चल रहा था। सुरेंद्र की पत्नी दीपाली मनरेगा के तहत काम ही नहीं किया है, बावजूद इसके भी 2018 में दर्री तालाब गहरीकरण एवं पचरी निर्माण कार्य में 6 दिन, 2019-20 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 60 दिन से अधिक का हाजिरी के अलावा 2020 में आवास पारा तालाब गहरीकरण, खेल मैदान समतली करण कार्य, गौठान के पास सड़क किनारे वृक्षारोपण कार्य के तहत फर्जी हाजरी भरकर शासन को हजारों का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।

दीगर पंचायत के मजदूरों के हक़ में डाका

नियम के मुताबिक, मनरेगा मजदूर जिस पंचायत के निवासी होते हैं, “जॉब कार्ड” उसी पंचायत का होता है, संबंधित गांव में रोजगार गारंटी (मनरेगा) के तहत कार्य उपलब्ध नहीं होने पर जनपद पंचायत सीईओ की अनुमति से दीगर पंचायत अथवा स्थान पर जाकर मजदूरी किया जा सकता है। चूँकि रोजगार सहायक सुरेंद्र गिरी ग्राम धनोरा का ही निवासी है और उसकी पत्नी दीपाली का ग्राम धनोरा में विभिन्न कार्यों के अलावा दीपाली गोस्वामी का ग्राम छेड़िया में लगभग 30 दिन तक बड़े नाली से हाई स्कूल तक पक्की नाली निर्माण कार्य, ग्राम पुरुर से झलमला तक पौधा रोपण, ग्राम बगदई में मुक्तिधाम के सामने पक्की नाली निर्माण कार्य में नाम दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि मनरेगा के नाम पर भर्राशाही चालू आहे।

अमित मंडावी (संवाददाता)

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Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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