Chhattisgarh

मूलभुत समस्या से आंगनबाड़ी के नौनिहालों का हाल; बेहाल …

बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ पोषण आहार का दावा करने वाला “महिला एवं बाल विकास विभाग”, आंगनबाड़ी केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में अपाहिज साबित हो रहा है। मध्य प्रदेश का विभाजन होकर एक नए राज्य के तौर पर छत्तीसगढ़ राज्य का उदय हुए 24 साल हो गए, मगर हाल ये है कि प्रदेश के तमाम जिला के गली-मोहल्लों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र, मूलभुत समस्याओं से जूझते अपनी दुर्दशा पर खून के आंसू पीने मजबूर है।

गुरुर hct : बालोद जिला के अधीन गुरुर जनपद के तहत ग्राम पंचायत मोखा स्थित गुंड़रा पारा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 02 विगत कुछ माह से ना सिर्फ बिजली की सुविधा से वंचित है, बल्कि पानी के अभाव में शौचालय की समस्या से भी जूझ रहा है। यदि हाल-मुकाम का जायजा लिया जाए, तो बता दें कि हगास लगने पर लोटा लेकर खेत खलिहान या फिर आंगनबाड़ी से घर के बाड़ी तक दौड़ लगानी पड़ती है। यह समस्या आज कल की नहीं; बल्कि गंगा पुत्र भीष्म की मृत्यु शैय्या की तरह विगत 10 बरसो से यथावत बरक़रार है।

लगा चुके है गुहार, नहीं सुनती सरकार

कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने हमारे संवाददाता से रूबरू होकर बताया कि इस विकराल समस्या से निजात हेतु अनेकों बार जनप्रतिनिधियों के समक्ष गुहार लगा चुके हैं, लेकिन मजाल है कि किसी नालायक का ध्यान इस ओर चला जाए ! मुसीबत का सबब तो यह कि इस जड़वत समस्या का सारा ठिकरा, सहायिका के सर ही फूटता है, क्योंकि अगर छोटे छोटे बच्चें आंगनबाड़ी में अगर सू –सू–पोट्टी कर देता है, तो सफाई भी उसी के हिस्से आता है।

कुछ ऐसा ही हाल MCB जिले के नगर निगम चिरिमिरी के गेल्हापानी में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र बाल्मीकि वार्ड का …

बना रहता है आवारा कुत्तों से जान का खतरा

एक तो मोदी जी का यह जुमला कि “ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा” भारी, तीस पर तुर्रा यह कि शौचालय तो बन गए हैं मगर पानी के अभाव में पीछे के सफाई की समस्या। ले देकर घर भेजने की जुगत में आवारा कुत्तों का डर। आए दिन सोशल मीडिया में दिल दहला देने वाली वायरल वीडियो ने उन तमाम माँ बाप को चिंता में डाल रखा है जिसमें यह दिखाया जाता है कि देखिए चार साल के मासूम को गली के आवारा कुत्तों ने कैसे अपना शिकार बनाया, बच्ची चीखती रही और कुत्तों में उसे नोंच डाला…, आदि-अनादि। सड़क के ये रहनुमा और इंसानों के वफादार कुत्ते कभी कभी बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से बिल्कुल सही नहीं होते, जिसके कारण बच्चो के माता पिता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका से भी खफ़ा रहते हैं।

घटते घटते घट ही गई; आँखों देखी घटना…

यही नहीं, बच्चें जिस हाल (भवन) में बैठकर पढ़ाई करते है वहीँ नल जल कनेक्शन अंदर में लगा दिया गया है। बच्चो का वजन करने वाला तौल जो कि लोहे की एंगल के सहारे छत की दीवाल पर लटका हुआ था, अचानक एक महिला अपने बच्चें का वजन करने के लिए जैसे ही हाथ लगाया एंगल नीचे गिर गया अच्छा हुआ की बच्चें को बैठाया नही था और बाकी बच्चें थोड़ी दूर में बैठे हुए थे नही तो एक बड़ी घटना घट सकती थी। और समय रहते समस्या का निदान नही किया गया तो कभी भी अप्रिय घटना घटने की संभावना बनी हुई है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अस्तला सिन्हा का कहना है कि

सबसे बड़ी समस्या हमारे आंगनबाड़ी में पानी की है जो बरसो से है, बच्चो को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए पानी की व्यवस्था किसी अन्यत्र स्थान से करना पड़ता है। इस समस्या से तो जैसे – तैसे निजात मिल भी जाता है मगर सरकार के पोषण आहार जब पाचन क्रिया पर बन आए तो समस्या शौचालय की समस्या किसी मरने वाले को जैसे जिंदगी की चाहत हो, उसी माफ़िक या उससे कमतर नहीं होती। पीने के लिए पानी की सुविधा नही है। बिजली कनेक्शन तो है लेकिन दो माह से बंद पड़ी है। छत भी कमजोर हो चुकी है, पंखा कभी भी नीचे गिर सकती है। सरपंच और महिला बाल विकास विभाग सुपरवाइजर से लेकर अधिकारी तक को इस बात से कई बार अवगत करा चुकी हूँ फिर भी समस्या ज्यो का त्यों है।

अमित मंडावी (संवाददाता)

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Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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