Corruption

ग्राम पंचायत मासबरस के भ्रष्ट सरपंच / सचिव की खुली दास्तान।

कांकेर hct : सुदूर बस्तर में भ्रष्टाचारियों का कितना बोलबाला है; इसका अंदाजा उत्तर बस्तर के कांकेर जिलान्तर्गत अंतागढ़ जनपद क्षेत्र में स्थित एक छोटे सा ग्राम पंचायत मासबरस में सरपंच – सचिव की मिलीभगत में हुए लाखों के घोटाला की उजागर से लगाई जा सकती है। सूचना का अधिकार से प्राप्त जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत मासबरस के भ्रष्ट सरपंच श्रीमती प्रतिमा पदमाकर एवं भ्रष्टाचार के त्रिमूर्ति सचिव राजेंद्र कुमार साहू, नोहर सिंह ध्रुव और पीताम्बर सिंह नाग के द्वारा बगैर ग्राम पंचायत प्रस्ताव एवं ग्राम सभा तथा ग्राम विकास समिति के प्रस्ताव के बिना ही लाखों की राशि का आहरण कर गबन कर लिया गया है।

जाँच प्रतिवेदन की प्रमाणित प्रति

अवगत हो कि कुछ जागरूक ग्रामवासियों ने उपरोक्त भ्रष्टारोपियों के खिलाफ उनके कारगुजारियों का उल्लेख करते हुए थाना प्रभारी अंतागढ़ को प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर दिनांक 13/12/2023 को एक लिखित शिकायत भी किया है। मगर, अमूमन थानों में आरोपियों को सह देने में विभाग के माहिर कुछ पुलिसकर्मी कानून की बारीकियों से खेलते हुए मामले में कोताही बरतने से चूक नहीं करते।

ग्रामीणों द्वारा थाना प्रभारी अंतागढ़ के नाम शिकायत की छायाप्रति

जिम्मेदारों ने साध रखी है मौन

चूँकि मामला जनपद से जुड़ा हुआ हैं और सम्बंधित विभाग से इस मामले में किसी प्रकार से कोई संज्ञान नहीं लिया जाना भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिए जाने का सबब जान पड़ता है। जबकि इस महाघोटाले को लेकर जनपद पंचायत अंतागढ़ की ओर से जाँच समिति गठित की गई थी, जिसमें 850740.00 की शासकीय राशि वसूली योग्य टंकित है और उक्ताशय की जानकारी जिला पंचायत कांकेर के सभी कर्णधारों सहित कलेक्टर कांकेर के भी संज्ञान में यह है।

सरकार ने दे रखी है छूट

आश्चर्य तो नहीं, मगर कह सकते हैं कि यह सिर्फ एक पंचायत से जुड़ी गबन-घोटाले की दास्तान है; जिसके उजागर होने के बावजूद जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है जबकि ऐसा प्रदेश के तमाम पंचायतों में होते आया है, देश के इतिहास में आज तक किसी भी सरपंच सचिव से वसूली नहीं की गई है। मगर सरकार की उदासीनता के चलते छत्तीसगढ़ के 24 साल के इतिहास में आज तक किसी भी सरपंच-सचिव से एक रूपए की भी वसूली का कहीं कोई समाचार तो दूर कोई चर्चा भी नहीं।

अमित मंडावी (संवाददाता)

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Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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2 Comments

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