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होर्डिंग घोटाला : मिस्टर मेयर टेक केयर …

सत्ता सूरा में मदमस्त जनप्रतिनिधियों की आँखों में धूल झोंककर अफसरों ने 27 करोड़ का घपला कर दिया और मिस्टर मेयर बड़ी मासूमियत से मीडिया में यह कहकर खुद की पीठ थपथपा रहे कि करोडो का घोटाला हो गया और उन्हें पता ही नहीं चला और अब यानि एक साल बाद उनके संज्ञान में लाई जा चुकी भारी चूक से मुंह मोड़ते हुए कह रहे हैं कि उक्त मामले में एफआईआर होगी !

रायपुर hct : राजधानी रायपुर का विगत इन चार सालों में समूचा कबाड़ कर दिया गया है। नया बस स्टैंड की ओर से शहर के चौतरफा आखरी छोर तक गड्ढामय शहर में तब्दील किया जा चुका है। सड़कों की हालात तो चलने लायक नहीं तिस पर तुर्रा यह कि भाजपा शासन में जिस चौक-चौराहों को तोड़कर यातायात के दबाव को कम करने का प्रयास किया गया था, उसी स्थानों में पुनः नए चौक-चौराहों का निर्माण किया जा रहा है और हमारे सम्माननीय महापौर को ज्ञात ही नहीं की ये सब किसके दिशा-निर्देश पर हो गए … ! खैर; “खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान” किसी ने यूँ ही नहीं कहा है।

इंटक नेता नेता आशीष देव सोनी ने उठाया था मामला

शहर के डिवाइडरो पर स्थापित मिनी यूनिपोलो की निविदा आमंत्रण सूचना (संशोधित) क्र.797/भ.नि.अ.प्र./न.पा.नि./2019, दिनांक 26.06.2019 के नियम विपरीत भ्रष्ट नौकरशाहों ने नवीनीकरण कर निगम को करोड़ों की राजस्व हानि पहुंचाने के सम्बन्ध में मजदूर कांग्रेस के नेता आशीष देव सोनी ने माननीय राज्यपाल सहित मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लेकर मुख्य सचिव, आयुक्त और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (E.O.W.) के अलावा पुलिस अधीक्षक तथा सम्बंधित थाना तक में दिनांक – 07.03.2022 को उक्त घोटाले की शिकायत किया रहा।

नगर पालिका निगम, रायपुर सीमा क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न डिवाईडर पर शहर की सौंदर्यीकरण एवं बेहतर नागरिक सुविधा प्रदान करने हेतु कुल 11 रोड ग्रुप में 126 मिनी यूनिपोल (साइज 15×9) 3 वर्षों के लिए BOT आधार पर स्थापित करने हेतु अधिकतम दर प्राप्त करने निविदा आमंत्रण सूचना (संशोधित) क्र. 797/भ.नि.अ.प्र./न.पा.नि/2019 दिनांक 26.06.2019 को जारी की गयी थी, जिसमें विभिन्न नियम व शर्तों का उल्लेख भी किया गया था।

आशीष देव सोनी

नियमों को रखा गया ताक पर

निविदा में नियम व शर्त क्रमांक 4 में रायपुर नगर निगम द्वारा साफ उल्लेख किया गया था कि मिनी यूनिपोलो पर BOT के आधार पर विज्ञापन का अधिकार के लिए निविदा 3 वर्ष हेतु आमंत्रित की गयी है, व अवधि समाप्ति पश्चात सभी स्थापित यूनिपोल स्वमेव नगर निगम रायपुर को हस्तानातरित हो जाना चाहिए था मगर निविदा शर्तों के आधार पर सन 2021 में उक्त BOT के आधार बुलाई गयी निविदा का नवीनीकरण विभिन्न एजेंसियों का पुनः 5 साल 9 महीने के लिए कर दिया गया? निविदा मे नियम व शर्त क्रमांक 5 में रायपुर नगर निगम द्वारा साफ़ उल्लेख किया गया था कि अनुबंध 3 वर्षों के लिए किया जायेगा तथा प्रत्येक वर्ष समाप्ति पश्चात स्वीकृत दर में 5% की कामोतर वृद्धि की जावेगी राशि निर्धारित अवधि में जमा न कराये जाने पर कुल देय राशि में 1% की दर से अधिभार भी लिया जायेगा।

5 माह का राजस्व नुकसान लाखों का होकर करोडो में तब्दील

निविदा में नियम व शर्तें क्रमांक 8 व 11 रायपुर नगर निगम द्वारा साफ उल्लेख किया गया था कि मिनी यूनिपोलो की संख्या बढ़ाई या घटाई जा सकती है पर कही भी साइज बढ़ाने या घटाने का जिक्र नहीं था और साफ लिखा था नियम 11 में किसी भी स्थिति में साइज 15×9 से अधिक नहीं होना चाहिए, फिर कैसे सन 2021 में नियम विपरीत नवीनीकरण में साइज बढ़ा के 18×18 व 20×20 कर दी गयी। इतनी बड़ी साइज का मिनी यूनिपोल डिवाइडर पर लगाने से जान-माल की हानि का घोर आशंका भी निर्मित हो गयी है व नियम एवं शर्त का घोर उल्लंघन भी किया गया है। निगम को साइज बढ़ा कर अधिक राजस्व की प्राप्ति करने के लिए निविदा निरस्त करते हुए नयी निविदा जारी क्यों नहीं की गयी ? जिससे और अधिक राजस्व की प्राप्ति हो सकती थी। बढ़ी हुई साइज को लगाने के लिए पुनः 5 माह का समय बिना कोई राशि लिए किस नियम के तहत दिया गया जिससे निगम को 5 माह का राजस्व नुकसान लाखों का होकर करोडो में तब्दील हो गया।

भ्रमित करता है दैनिक भास्कर !

ऐसा नहीं है कि उक्त शिकायत से महापौर अनभिज्ञ थे, जिस कार्पोरेटी अख़बार ने बड़े जोर शोर से महापौर के इस लापरवाही को बड़ी चालाकी से छिपाकर उसे हीरो बनाने में कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी उसी अख़बार के एक चर्चित विशेषांक में दिनांक 12/03/2022 में इस मुद्दे को तूल दिया था जिसमे महापौर ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा था कि उन्हें इस सम्बन्ध में कोई जानकारी नहीं है। और दस्तावेज की मांग करते हुए मामले में जाँच के बाद कार्रवाई का कथन उल्लेखित है। उसी अख़बार के वेब समाचार में यह खबर पढ़ने को मिलता है कि बकौल महापौर : “20 दिन लगे स्टडी करने में कागजों में घुमाकर काम किया गया है। इसके लिए मैंने 4 एक्सपर्ट लोगों से बात की 2 आदमी बाहर से बुलाए गए। तब पता लगा कि गड़बड़ी हुई है। 27 करोड़ का नुकसान जो हुआ उसकी भरपाई हम करेंगे … “

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Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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