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छत्तीसगढ़ पापुनि में महाघोटाला : 72 करोड़ का घोटाला 130 करोड़ में तब्दील !

पापुनि छत्तीसगढ़ अब घपलों-घोटालों का घरौंदा हो गया है। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी ने सुनियोजित ढंग से अपने ही परिजन के नाम से फर्जी संस्थान गठन कर उस संस्थान को करोडों रुपए का ठेका देकर जिस घोटाले की नींव रखी थी वर्तमान अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने उस पर महाघोटाले की ईमारत तान दिया है। 72 करोड़ का घोटाला 130 करोड़ में तब्दील हो गया है। सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार पाठ्य पुस्तक निगम 130 करोड़ का ई टेंडर घोटाले का पर्दाफाश हो चुका है।

रायपुर hct : यद्यपि संपूर्ण देश में 14 वर्ष तक के लिए नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा राज्य सरकारों के साथ संघीय सरकार की जिम्मेदारी है। मगर छत्तीसगढ़ प्रदेश में शिक्षा के नाम पर हर वर्ष घोटाला सुरसा के मुख की भांति बढ़ते जा रहा है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 2023-24 के लिए विभाग ने स्कूली बच्चों को मुफ्त प्रदान करने वाली पुस्तकों की छपाई के लिए करीब 10,000 टन कागज खरीदी की निविदा निकाली गई थी। बता दें कि हर वर्ष 130 करोड़ की खरीदी की जाती है। छपाई के बाद इन किताबों का वितरण हर साल विभाग स्कूली बच्चों को करता है। इस हेतु देश के अन्य प्रांतों से विभिन्न कंपनियों ने निविदा भरा था जिसमें गुजरात के शाह पेपर मिल्स लिमिटेड, पंजाब से सेथिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड, चढ्ढा पेपर्स लिमिटेड, उत्तर प्रदेश और श्रेयांस इंडस्ट्रीज, दिल्ली भी शामिल हुए।

इनको मिला टेंडर

जिनमें कि गुजरात की मे. शाह पेपर मिल्स लिमिटेड, वापी, गुजरात द्वारा टेंडर के लिए लोवर रेट मिला। इस कंपनी ने 1,18,800 अतिरिक्त जीएसटी का रेट भरा था। सरकार ने एक लाख 13 हजार अतिरक्त जीएसटी के साथ यह टेंडर 3000 मिट्रीक टन 70 जीएसएम पेपर खरीदने के लिए गुजरात की कंपनी को दे दिया। एल1 के आधार पर बाकी 3 कंपनियों से निगोशिएशन कर लिया गया।

आपको चौका देंगे ये इत्तेफाक

इसे इत्तेफाक कहें या युनियोजित घोटाला देश के अलग-अलग राज्यों की कंपनियों ने एक ही दिन 19 सितंबर 2022 को एक घंटे के अंतराल में ही टेंडर भर दिया। चौकाने वाली बात यह है कि चार अलग-अलग कंपनियों ने टेंडर का फाइनल सब्मिशन एक ही सिस्टम या लैपटॉप से किया जिसका सिस्टम इंफॉर्मेशन क्रमांक- WIN-0617OQKNPH7 है। टीआरपी ने आईटी विशेषज्ञों से इसकी जानकारी लेकर यह पुख्ता की है।

विभाग प्रमुख एवं कंपनियों की मिलीभगत !

आपको बता दें टेंडर फाइनल करने के कई नियम होते हैं। जिसमें पहले टेंडरों की स्क्रूटनी की जाती है। कंपनी की भूमिका भी जांची जाती है। कई स्तरों पर दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी कंपनी को एक टेंडर दिया जाता है। ऐसे में पाठ्य पुस्तक निगम की यह कारस्तानी समझ से परे हैं। क्या विभाग ने कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच नहीं की या उपरी स्तर पर कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए 130 करोड़ का यह टेंडर चार कंपनियों को दे दिया गया। इस संबंध में विभाग के एमडी रितेश अग्रवाल से उनका पक्ष जानने की कोशिश की। फोन से कई बार संपर्क किया मगर उनसे इस संबंध में बात नहीं हो सकी।

ज्ञात हो कि इससे पहले भी 78 रु का कागज 113 रुपए में खरीदा जा चुका है। इसकी शिकायत भी ईओडब्लू में की जा चुकी है। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम कर रहा देश में सबसे महंगे कागज की खरीदी, 27 करोड़ का बढ़ा अतिरिक्त बोझ दोगुने भ्रष्टाचार को किफायती दर की शक्ल दे रहा छग पाठ्य पुस्तक निगम, 27 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान कागज की चमक और पारदर्शिता के पीछे छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम छिपा रहा अपना एक और भ्रष्टाचार छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम ने खास फर्म्स को काम देने टेंडर की तारीख निकलने के बाद जोड़ दिया ये नया नियम !

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Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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