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अनूपपुर जिला कांग्रेस में ‘गेहूँ की घुन’ की तरह हैं कुछ कथित कांग्रेसी… !

कांग्रेस जोड़ो की जगह कांग्रेस तोड़ो की राजनीति हावी

श्रीराम शुक्ला

मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले की कोतमा विधानसभा में भ्रष्ट सामंती टूटपुजिहा राजनीति के इशारे पर जिस तरह पार्टी की छिछालेदर पिछले कुछ सालों से की जा रही है उस पर लगाम लगाने की हिम्मत आखिर कांग्रेस के प्रभारी दोहरी भूमिका क्यों निभा रहे हैं। अगर वे सोच रहे हैं ऐसे लोगों को निष्काषित करने से नुकसान होगा तो वे कांग्रेस की बर्बादी का रास्ता बना रहे हैं। फिर पीसीसी के प्रभारी का जिले में बैठने का क्या औचित्य।

आपको बता दें कि कांग्रेस 2020 में हुए अनूपपुर उपचुनाव के बाद जिले में कांग्रेस अस्थिर है वह जुतम पैजार से गुजर रही है। जयप्रकाश अग्रवाल फुन्देलाल से ज्यादा काबिल जिलाध्यक्ष थे। उनके इस्तीफे के बाद अपनी विधायकी के बल पर जिलाध्यक्ष पद तो हथिया लिया पर कांग्रेस की हालत जिले में बद से बदतर कर दी वह तो रमेश सिंह के प्रयास थे कि अनूपपुर में संतुलन बनाए रखा और अनूपपुर अविवादित रहा। लेकिन तीन पाटों के बीच पिस रही अनूपपुर जिला कांग्रेस में जिस तरह से भारत जोड़ो यात्रा को विवादित बनाने का प्रयास किया गया वह राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा के उद्देश्य से जरा भी मेल नहीं खाता। इन परिस्थितियों के लिए वे (गाँजा तस्कर) अधिक जिम्मेदार नहीं हैं जो कोतमा में अपनी जमीन तलाशने जोड़ तोड़ कर कांग्रेस को विवादित कर रहे हैं। बल्कि विधायक सुनील सराफ, विधायक फ़ुंदेलाल सिंह मार्को, और अनूपपुर विधानसभा के आगामी चुनाव के सम्भावित प्रत्याशी रमेश सिंह और नए नवेले पीसीसी से भेजे गए प्रभारी जितने जिम्मेदार हैं।

अब देखिए जिलाध्यक्ष का एक अतिमहत्वपूर्ण पद खाली पड़ा है इस्तीफे के बाद भी अपने कद का इस्तेमाल लेटर पैड के रूप में कांग्रेस को विवादित करने कितनी बेशर्मी से कर लिया गया। जिसमें कोतमा विधानसभा में विधायक सुनील सराफ से वैचारिक मतभेद वालों को जिम्मेदारी दी गई तो अनूपपुर में पूर्व प्रत्याशी विश्वनाथ सिंह को बट्टे खाते में डाल दिया गया। जिसमें स्पष्टरूप से प्रभारी और कुछ लोगों के षणयंत्र की बू आ रही है। जो कांग्रेस जोड़ो की बजाय कांग्रेस तोड़ो का प्रयास है।

अगर ऐसा ही चलता रहा तो विंध्य का एक मात्र जिला जो अभी तक कांग्रेस का गढ़ रहा है डहते देर नहीं लगेगी। नवंबर 2022 समाप्त होने जा रहा है और ठीक एक साल बाद नवंबर 2023 में चुनाव की डुगडुगी बजेगी। पर जिले में कांग्रेस की तैयारियों का अता पता नहीं है। हां कुछ प्रवासी प्रत्याशी बनने मन का लड्ड़ु खा सम्भावनाओँ के भँवर में गोते जरुर लगा रहे हैं जो जिला कांग्रेस में गेहूँ में लगी घुन की तरह हैं जो धीरे-धीरे कांग्रेस को खा रहे हैं।

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Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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