नारद का कौशल : जाति फर्जीवाड़ा कर खिलाया कमल !

आरक्षण किसे पसंद नहीं? इस बला को लेकर कहीं बवाल मचा है तो कहीं सवाल खड़ा हुआ है। वैसे तो आरक्षण सरकारी सेवाओं और संस्थानों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं रखने वाले पिछड़े समुदायों तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों से सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सरकार ने साल १९३५ में इसका प्रावधान रखा था, लेकिन कुछ धूर्त और शातिर किस्म के लोगों ने इसका बेजा फायदा उठाकर इसका भरपूर मजा लेते आए हैं। राजनीतिज्ञों ने अपनी राजनीति रोटी सेंकने इसे राजनीतिक अखाड़ा बना रखा है। कुछ इन्हीं तबके के लोगों में शामिल, राजधानी रायपुर के संत कबीरदास वार्ड में एक शातिर ने विगत एक दशक से अधिक समय से कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से शासन-प्रशासन और जनता की आँखों में धूल झोंककर किसी हकदार का हक मार जनसेवक बनकर राजनीति की मलाई खाने मदमस्त है।
संत कबीरदास वार्ड के पार्षद नारद के विरूध्द वार्ड के ही निवासियों ने जाति प्रमाण पत्र पर सवाल खड़ा कर सम्बंधित थाना, पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत की है, लेकिन बात यदि आम आदमी की होती तो वह अब तक लाल गेट के अंदर होता। बात देश की बड़ी पार्टी के नेता की होने के कारण उक्त शिकायतें पुलिस प्रशासन के फाईलों में धूल खा रही है। फर्जी जाति प्रमाण पत्र की सहारे नारद वार्ड क्रमांक ०३ में अपना कौशल दिखा रहा है। नारद के जाति प्रमाण पत्र के सम्बंध में शिकायतकर्ता द्वारा जानकारी प्राप्त किए जाने पर उक्त प्रमाण पत्र सम्बंधित अधिकारी या कार्यालय द्वारा जारी नहीं किया गया बताया गया, ऐसे में प्रत्याशी द्वारा नगरीय निकाय निर्वाचन में प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र फर्जी व कूटरचित होना संभाव्य है। फिर भी उक्त शिकायतों पर पुलिस प्रशासन की खामोशी समझ से परे है।

रायपुर hct : राजधानी के नगरीय निकाय में विगत 03 कार्यकाल से आम जनता पंजा छाप पर मेहरबान है, ऐसे में वार्ड क्रमांक 03, संत कबीरदास से कमल छाप पर वर्तमान पार्षद नारद अपने कला कौशल से निर्वाचित होते रहे हैं। नगरीय निकाय निर्वाचन 2019 में नगर पालिका निगम रायपुर के वार्ड क्रमांक 03 में निर्वाचन उपरांत भाजपा प्रत्याशी नारद कौशल को निर्वाचित घोषित किया गया। अवगत हो कि वार्ड क्रमांक 03, अनुसूचित जाति हेतु आरक्षित वार्ड रहा है।

भाजपा प्रत्याशी ने अपने नाम निर्देशन पत्र के साथ स्वयं को “महार” जाति का बताते हुए अपना नामांकन, निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया। उसी वार्ड के अन्य उम्मीदवारों द्वारा भाजपा प्रत्याशी के नामांकन पत्र पर विरोध दर्ज कराया किन्तु निर्वाचन अधिकारी द्वारा अमान्य कर दिया गया। भाजपा प्रत्याशी द्वारा अपने नामांकन पत्र के साथ जो जाति प्रमाण पत्र संलग्न किया, तत्संबंध में एक आवेदक द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी प्राप्त की। जानकारी के अनुसार अनुविभागीय दण्डाधिकारी (नगर) रायपुर छ०ग० ने के पत्र में बताया गया कि नारद कौशल, पिता श्री सुख राम कौशल जाति महार का प्रकरण क्रमांक-222/ब/121/ वर्ष 2004-05 का प्रमाण पत्र कक्ष क्रमांक-11 मे दर्ज होना नहीं पाया गया।

 

उक्तानुसार एक अन्य आवेदक द्वारा प्रमाण पत्र से सम्बंधित जानकारी अनुविभागीय अधिकारी रायपुर से जनवरी 2020 में चाही गई, जिसमें उक्त प्रमाण पत्र कार्यालय द्वारा जारी नहीं किया जाना बताया गया। भाजपा प्रत्याशी नारद कौशल के जाति प्रमाण पत्र के सम्बन्ध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से प्राप्त जानकारी के अनुसार यदि उक्त अधिकारी द्वारा नारद कौशल का जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है तो भाजपा प्रत्याशी ने उक्त जारी प्रमाण पत्र जो निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया है, उस पर प्रश्न चिन्ह उत्पन्न होता है। भाजपा प्रत्याशी के जाति प्रमाण पत्र के सम्बन्ध में जिला स्तरीय प्रमाण पत्र सत्यापन समिति द्वारा भी एक शिकायत पर उल्लेखित किया है कि नारद कौशल के जाति प्रमाण पत्र की वैधता उक्त पत्र अनुसार प्रमाणित नहीं की जा सकती।

भाजपा प्रत्याशी के द्वारा प्रस्तुत उक्त जाति प्रमाण पत्र व सक्षम अधिकारी द्वारा प्राप्त जानकारी का अवलोकन किया जावे तो उक्त जाति प्रमाण पत्र फर्जी व कूटरचित माना जा सकता है ? उक्त जाति प्रमाण पत्र से सम्बंधित एक शिकायत, शिकायतकर्ताओं द्वारा थाना प्रभारी गुढिय़ारी, थाना प्रभारी अजा/अजजा, विशेष थाना रायपुर व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर को दिनांक 05 फरवरी 2020 को की गई है, जिस पर सम्बंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा आज तक कोई कार्रवाई किए जाने की जानकारी अप्राप्त है। नगरीय निकाय निर्वाचन के सफलतम 03 वर्ष पश्चात् भी शिकायतकर्ताओं के आवेदन पर पुलिस प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न किया जाना यक्ष प्रश्न है।

उपरोक्त समस्त दस्तावेजों पर गौर किया जाए तो पार्षद नारद कौशल द्वारा स्वयं को महार जाति का बताते हुए जिस प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया है उसका अस्तित्व ही नहीं है फिर प्रश्र उठता है कि उक्त जाति प्रमाण पत्र कब और किसने जारी किया। साथ ही उन समस्त दस्तावेजों का भी मूल्यांकन आवश्यक है जिसके आधार पर नारद स्वयं को अनुसूचित जाति वर्ग का बताता है।

नारद कौशल
भाजपा पार्षद
संत कबीरदास वार्ड क्रमांक 03

मजे की बात तो यह है कि तथाकथित जिस जाति प्रमाण पत्र के संबंध में सम्बंधित अधिकारियों द्वारा जानकारी प्रदान की गई है उसी जाति प्रमाण पत्र का फायदा कौशल ने एक नहीं कई बार उठाया। रही बात उक्त जाति प्रमाण पत्र से संबंधित शिकायत की तो जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों ने अब तक उक्त प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं की ? प्राप्त जानकारी के अनुसार नारद द्वारा स्वयं को महार जाति का होना बताया जाता है जबकि वह उक्त जाति वर्ग की श्रेणी में नहीं आता।

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