ChhattisgarhCrime

न्यायिक हिरासत में पेशी में लाए पत्रकार पर जान लेवा हमला…!

पुलिसिया संरक्षण में गुंडे का हौसला बुलंद। पुलिस के सामने दी जान से मारने की धमकी !
“हां मैं गुंडा बदमाश हूँ।” मेरा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता…

न्यायालय के सामने न्यायिक अभिरक्षा में पुलिस कस्टडी में रहे पत्रकार पर एक गुंडे ने हमला कर दिया ! इस *सुनियोजित घटना में पुलिस का असहयोगात्मक रवैय्या से संदेह उत्पन्न होना लाज़मी है कि कहीं न कहीं मामले में खाकी भी तो संलिप्त नहीं…? फिर भी सीधे आरोप से बचने किसी तरह पुलिसकर्मियों ने बचाव कर हमलावर को भगाया भी दिया।

अम्बिकापुर hct : न्यायालय के सामने घटित होने का वीडियो जारी। बता दें कि, समाचार पत्र भारत सम्मान के सम्पादक जितेंद्र कुमार जायसवाल जिस पर छत्तीसगढ़ पुलिस खुन्नस के चलते विभिन्न मामलों में षड्यंत्र के तहत सूरजपुर, बलरामपुर सहित सरगुजा जिले में अपराध पंजीबद्ध कर जेल भेज दिया गया है, जिसे सूरजपुर जिला जेल में कैद रखा गया है।

बीते मंगलवार को पेशी के लिए पुलिसकर्मियों द्वारा जितेन्द्र को अम्बिकापुर न्यायालय लाया था पेशी उपरांत जब उसे न्यायालय के पिछले रास्ते से ले जाया जा रहा था; उसी वक्त संभवतः एक और सुनियोजित योजना के तहत जिला के एक नामी बदमाश मजहर नामक गुंडे ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया ! अचानक हुए इस हमले से पुलिस कर्मियों ने जितेंद्र को उससे सुरक्षित दूर तो कर दिया लेकिन इस संरक्षित गुंडे का हौसला इतना बुलंद है कि वह खुले आम न्यायालय के सामने पुलिस के समक्ष अश्लील गाली–गलौज कर जान से मारने की घमकी भी देने लगा।

मौका–ए–स्थल पर जितेंद्र की पत्नी और बच्चे भी थे जो इस बात के प्रत्यक्षदर्शी हैं। इसके अलावा कुछ और भी नागरिक वहीं आसपास मौजूद थे जिन्होंने उक्त वाकया का वीडियोग्राफी भी किया है।

जितेंद्र की पत्नी ने मदद की आस में जिला के पत्रकारों सहित राजधानी के भी पत्रकारों को उक्त वाकया से अवगत कराया है। उन्होंने फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि उनके स्वयं के द्वारा तत्काल मामले की जानकारी न्यायाधीश को दी जिस माननीय न्यायाधीश ने संज्ञान लेते हुए कोतवाली थाने में अपराध पंजीबद्ध कराने को कहा, पश्चात उनके द्वारा *कोतवाली थाना में शिकायत किए जाने पर अपराध दर्ज करना तो दूर शिकायत तक नही लिया गया ! इसी बात से पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह किया जा रहा है।

गौरतलब है कि हमलावर वही बदमाश है, जो रेलवे स्टेशन पर गुंडागर्दी कर अवैध वसूली के आरोप में जेल गया था जिसका समाचार जितेंद्र ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

खाकी के साए में अपराधियों के हौसले बुलंद 

यह सर्वविदित है कि प्रदेश में अपराधियों को खाकी और सफेदपोशों का संरक्षण प्राप्त है। निरंकुश सरकार के चलते मंत्री से लेकर संतरी की जरूरत बने गुंडे–बदमाशों के हौसले बुलंदी पर हैं। राजधानी में तो आए दिन चाकूबाजी और तमंचे लहराए जाने की घटना आम है। वहीं अब इनका दायरा प्रदेश सभी जिलों में बढ़ता जा रहा है। जिसका नतीजा अंबिकापुर में देखने को मिला है।

शहर के बीचों बीच पुलिस के कस्टडी में न्यायालय के सामने एक पत्रकार को जान से मारने की घमकी देकर हमला कर रहे हैं। मजहर नाम का यह वही गुंडा है जो पत्रकार जितेंद्र जायसवाल के गिरफ्तारी पर एसपी कार्यालय पहुंच गुलदस्ता भेंट कर उनके बगल में खड़े हो फोटो भी खिंचवाया और जयकारा लगाया था। इस बात से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है जब छटे हुए गुंडे–बदमाश सार्वजनिक रूप से पुलिस का जयकारा करने लगे तो क्या गुल खिल रहे हैं। फिलहाल जितेंद्र सुरक्षित है और उसने सभी जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र लिखकर देने की बात कही है।

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Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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