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महिला आरक्षक का खौफ : पल–पल मौत की ओर अग्रसर पीड़ित दंपत्ति…

राजधानी रायपुर स्थित सरस्वती नगर थाना में पदस्थ एक महिला आरक्षक की करतूत के चलते समूचा छत्तीसगढ़ के पुलिस की वर्दी और उसकी कार्यप्रणाली पर फिर से एक बार ऊंगली उठ रही है। खाकी के सितम का यह कोई पहला मामला नहीं है, मीना खलखो हत्याकांड, पुलिस हिरासत में पंकज बेक की हत्या में शामिल आरोपी पुलिस अधिकारी; विनीत दुबे, मनीष यादव, प्रियेश जॉन, लक्ष्मण राम व दीन दयाल सिंह सहित दर्जन भर से अधिक पुलिसकर्मियों से लेकर बस्तर में सैकड़ों निर्दोष आदिवासियों की हत्या के आरोपी पूर्व आईजी, शिवराम प्रसाद कल्लूरी जैसे इन वर्दी वालों ने बहुतेरे ऐसे कृत्य को अंजाम दिया है जिनके गुनाह की दास्तां आज भी न्यायालय की चौखट में इंसाफ की भीख मांगते बेबस एवं लाचार खड़ा है।

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रायपुर hct : रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सामने सरस्वती नगर थाना में पदस्थ एक महिला आरक्षक, अनिता चौहान से जुड़ा यह मामला सामने आया है जिसमें वर्दी पर गम्भीर आरोप है, लेकिन बड़े अधिकारी न्याय नहीं कर रहे ! तमाम सबूतों के बावजूद दोषी, महिला प्रधान आरक्षक पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा। दरअसल एक युगल दंपत्ति पिछले डेढ़ साल से इस महिला प्रधान आरक्षक की करतूत से बेहद परेशान है।

आखिर क्या है मामला ?

मामले की तह में जाने से पीड़ित पंकज ठाकुर पिता प्रमोद ठाकुर, निवासी मकान नंबर 383, ब्लाक नं 16 हाउसिंग बोर्ड कालोनी, खम्हारडीह रायपुर ने बताया कि उसने वर्ष 2021 माह फरवरी में एक चार पहिया वाहन “इनोवा” पसंद आने पर, जिसका बताया गया बाजार मूल्य 10,00,000 (दस लाख) था, लेने के लिए खुद के पास जमा पूंजी 5,00,000 (पांच लाख नगद) के अलावा 2,50,000 अन्यत्र (बैंक से लोन लेकर) इंतजाम करने पश्चात् शेष रकम की दरकार होने पर पड़ोस में रहने वाली अनिता चौहान से दिनांक 23.02.2021 को नगद 2,50,000 रूपया 10 प्रतिशत के दर से ब्याज पर लिया था।

उधार की रकम और वाहन के सौदे को लेकर बढ़ा विवाद

पंकज ठाकुर ने अपनी व्यथा बताते आगे जानकारी यह दिया कि वाहन का सौदा 10,00,000 (दस लाख) तय हुआ था और जब उत्साह से घर आकर वाहन से सम्बंधित दस्तावेज का अवलोकन किया; तब वह सकते में आ गया, क्योंकि उक्त दस्तावेज में वाहन की कीमत 8,60,000 अंकित था ! तब शंका होने पर सौदा के समय साथ गए अनीता चौहान के पति राहुल उर्फ़ भीखम साहू से पूछताछ करने पर उसके द्वारा टाल-मटोल किया जाने लगा बात यही से बिगड़ गई और फिर उक्त रकम को लेकर बहस बढ़ने लगा …

ढाई लाख के बदले चार लाख की मांग ! वाहन भी कब्जाने का प्रयास !!

04 दिसम्बर 2021 को अनिता चौहान द्वारा मेरे घर में आकर अचानक 4,00,000 रूपया की मांग करने के साथ-साथ मेरे द्वारा क्रय वाहन को अपने नाम से ट्रासंफर करने का दबाव बनाते हुए जबरदस्ती आरटीओ फार्म में दस्तख़त के लिए मजबूर करने लगी। उसके इस कृत्य का मेरे द्वारा यह कहकर विरोध किया गया कि, “मैंने आपसे लिया रकम विभिन्न किश्तों में समय पर जमा कर दिया है, जिसका मेरे पास प्रमाण मौजूद है, और आपको सिर्फ 7000 देना शेष निकलता है; जिसे जल्द ही मैं आपको वापस कर दूंगा।” इतना सुनते ही वह आवेश में आ गई और मुझसे बहस करते हुए कहने लगी कि मैं पुलिस विभाग में ऊँची पहुँच रखती हूँ एसपी, आईजी मेरा कुछ नहीं उखाड़ पाएंगे, ला दिखा, तू किससे बात कर रहा है ऐसा कहते हुए मुझसे झूमा-झटकी करते हुए वह मेरा मोबाईल छीनने का लगातार प्रयास करती रही।

देखिए वीडियो : 

महिला आरक्षक के पति का भी हौसला बुलंद।

करता है पीछा, देता है “किस्सा खतम” करने की धमकी..!
शिकायत के बाद भी पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई !

अनिता चौहान की दबंगई का आलम ये है कि वो खुलेआम करीब डेढ़ साल से गुंडई कर रही पर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही। पीड़ित, थाने से लेकर एसपी तक से मदद की गुहार लगा चुका है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल कोरे आश्वासन ही मिले। पीड़ित पंकज का कहना है कि, अनिता से उनका पैसों का लेनदेन था जिसमे उसने सारी रकम चुकता भी कर दिया है; फिर भी अनिता चौहान उस पर दवाब बनाती है प्रताड़ित करती है उनका पति भी पीड़ित के घर मे घुसकर जान से मारने की धमकी दे रहा, अनिता अपने वर्दी का डर दिखाती है और कहती है कि उसका कोई कुछ नहीं कर सकता परिवार बहुत परेशान है कहीं पर भी सुनवाई न होने से निराश है और मदद नहीं मिलने पर सपत्निक आत्मघाती कदम उठाने की बात कह रहा है।

पुलिस से नहीं मिली मदद

उसके इस कृत्य से मैं और मेरी पत्नी हतप्रभ रह गए और खुद को किसी साजिश में फसाए जाने की आशंका के चलते उक्त अचानक कारित घटना का हमारे द्वारा वीडियो बना लिया गया और मदद की आस में 112 में डायल कर उक्त घटना की सूचना दी गई, जिसके पश्चात् मौके पर तत्काल पहुंचे स्टॉफ ने हमें (दोनों पक्षों को) थाना खम्हारडीह लेकर चले गये।

थाना प्रभारी ने रकम अदायगी का बनाया दबाव

वहां पदस्थ थाना प्रभारी; ममता अली शर्मा के द्वारा थाना में 01 घंटा इंतजार के बाद दोनों पक्षों की बात सुनकर मुझ पर दबाव डाला गया कि इसका पूरा पैसा 03 माह के अंदर वापस करने की समझाइश देते हुए लिखित में देने का दबाव डाला गया। मेरे द्वारा थाना में लिखित आवेदन पेश किया तब मुझे छोड़ा गया और दूसरे दिन मुझे थाना वाले फोन कर इकरारनामा में हस्ताक्षर करने बुलाया गया किन्तु मैं हताशा में होने की वजह से थाना नहीं जा सका।

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Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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