वो जमाना लद गया जब तरुण चटर्जी, और विद्या चरण शुक्ल जैसे दिग्गज नेता किसी पार्टी को कन्धा देने की साहस रखा करते थे या यह भी कह सकते हैं कि कुर्सी के लिए कुछ भी करेगा, लेकिन झुकेगा नहीं साला …
तब अविभाजित मध्य प्रदेश और अब के छत्तीसगढ़ राज्य की जनता के पास भाजपा और कांग्रेस के आलावा कोई विकल्प नहीं था; अब समय ने करवट ले लिया है। दिल्ली के बाद पंजाब में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर आम आदमी पार्टी ने अपनी पकड़ और भी मजबूत कर लिया है और 2024 में होने वाली चुनावी महासमर में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों की जनता को इन दोनों भ्रष्ट दलों के आलावा एक साफ सुथरी विकल्प के रूप में खुद को तैयार किया है। मगर…

टी एस बाबा ‘आप’ पार्टी में शामिल हो सकते हैं …?

 

राजनीति है ही ऐसी दलदल जहाँ पैर डालते ही कीचड़ लगना स्वाभाविक है। पंजाब फतह के बाद विगत दिनों जब आम आदमी पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रभारी गोपाल राय के नेतृत्व में राजधानी रायपुर में विजय यात्रा निकालने की तैयारी हो रही थी उस दरमियान जो आप के बैनर तले जो जमात इकट्ठी हुई थी उस जमात में अनेक मुखौटाधारी रेत चोर और व्यापारियों के चेहरे सामने नजर आए। इन तमाम चेहरों को नजर अंदाज कर दें तो एक चेहरा वर्तमान सत्तारूढ़ दल से उभरकर सामने आ रहा है; जिस पर केजरीवाल भी दांव लगाने से मुंह नहीं मोड़ सकते, और वह चेहरा व्यक्तिगत रूप से भले ही सहृदय हो सकता है लेकिन राजनीतिक रूप से भूपेश बघेल के धुर विरोधी त्रिभुवनेश्वर शरण सिंहदेव यानि टी एस बाबा।

मगर जनता तो इन जनप्रतिनिधियों की नजर में जानवर से भी बदतर नजर आते हैं जनाब और यदि ”जनता हरामखोर है” तो फिर राजनीति के बिसात में “एक चरवाहा है तो दूजा कसाई” से कमतर भी नहीं…

टी एस बाबा को आम आदमी पार्टी के प्रबल दावेदार मानते हुए एक स्वतंत्र पत्रकार श्रीराम शुक्ला, अपने फेसबुक में वॉल पर लिखते हैं –

श्रीराम शुक्ला

टी एस सिंहदेव, नई पारी की शुरुआत की तैयारी में ?

कांग्रेस के पुराने नेताओं के पास कुछ आगे नया करने के लिए ज्यादा वक्त नहीं हैं। अगर पार्टी उन्हें नकारती है तो वे इसलिए भी दूसरा रास्ता चुनने से परहेज नहीं करते। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने रायपुर प्रेस क्लब में जो भी कहा है वह नया नहीं है, बल्कि वक्त की जरुरत है। लोग बदलाव चाहते हैं…

दिल्ली के बाद आप पंजाब में कामयाब राजनैतिक दल बन गया है। भारतीय जनमानस का उसकी ओर झुकाव स्वाभाविक है। भ्रष्टाचार पर लोग बात नहीं करते क्योंकि कांग्रेस, भाजपा में यह शिष्टाचार है। आप ने इसे अपनी ईमानदार कार्यशैली से दफन कर दिल्ली में जनता को राहत दी है। पंजाब में भी उसने यहीं से शुरुआत की है। जनता का फायदा इसी से है कि उसके सरकारी कामकाज बड़ी आसानी से हो जाएंगे।

हो सकता है यह उनकी आखिरी पारी भी हो… !

मोदी सरकार द्वारा बढ़ाई जा रही अधाधुंध मंहगाई से हर कोई राहत चाहता है। आप को इसी का फायदा मिलेगा और वह आने वाले दिनों में दूसरे राज्यों में भी ग्रोथ करेगी। छत्तीसगढ़ में टीएस सिंहदेव उसके लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं। यह सिंहदेव के राजनैतिक कैरियर के लिहाज से भी सही कदम होगा। क्योंकि कांग्रेस में भूपेश बघेल किसी को अपने आगे नहीं आने देंगे।

खैरागढ़ उप चुनाव के बीच सिंहदेव का आप में जाने की चर्चा से कांग्रेस के अंदर खलबली मचना स्वाभाविक है। पर इससे उपचुनाव में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हां भाजपा इसे जरुर भुनाने की कोशिश करेगी। लेकिन वह इस उपचुनाव में कोई खास प्रदर्शन नहीं करती है तो उसकी वापसी 2023 में सम्भव नहीं होगी। क्योंकि; आप तैयार है विकल्प के तौर पर और, अगर वह सिंहदेव को साथ लेती है; तो बहुमत तो नहीं, पर विपक्ष की भूमिका में आने से कोई नहीं रोक सकता और अगर अभी से वह जोर लगाएगी तो कह सकते हैं कि छत्तीसगढ़ की सत्ता उसके हाथ में हो यह कोई अतिश्योक्ति नहीं। उसके (आप) आने से 20 सालों से गहरी हुई नक्सल समस्या पर भी कोई अभूतपूर्व कदम उठाए जाएंगे इसमें कोई संशय नहीं है।

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By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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