रायपुर hct : बस्तर की खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के बिच मानवता को शर्मशार करने वाली ऐसे कई मंजर है जिसे देखने के बाद इंसान की इंसानियत भी कांप जाती है। नक्सलवाद की दंश से आहत बस्तर के कोना-कोना मानवता की भीख मांगती रही है, लेकिन ज़ालिमों ने निर्दोष गरीब आदिवासियों पर रहम नहीं किया। एक तरफ फोर्स पुलिस तो वहीं दूसरी ओर नक्सली इन दोनों के मध्य बस्तर के गरीब आदिवासी पीसकर रह गए। हजारों आदिवासियों को फर्जी नक्सली मुड़भेठ में मार गिराना, जबदस्ती नक्सली होने का आरोप लगाकर जेल में बंद कर देना यह बस्तर के अंदर दिनचर्या बनकर रह गई है।

जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई को लेकर बैठक

बस्तर के आदिवासी लगातार इस तरह से होने वाली अन्याय को लेकर आक्रोश में है, जिसके चलते जगह-जगह आंदोलन किया जा रहा है। आदिवासियों के द्वारा लगातार आंदोलन से सरकार की मुश्किलें बढ़ रही है, जिसे लेकर छत्तीसगढ़ सरकार सकते में है और जल्द आदिवासियों को मनाने की तैयारी में जुटी हुई है। सरकार की इसी तैयारियों का हिस्सा बस्तर के जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई भी है, जिसके संबंध में सरकार अब देर नही करना चाहती है जिसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को नक्सल अपराध के मामलों में जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई को लेकर एक बड़ी बैठक किया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ऐसे मामलों में गिरफ्तार स्थानीय आदिवासियों के लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। बघेल ने मंगलवार को अपने निवास कार्यालय में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू और आला अफसरों के साथ इसकी समीक्षा की। बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा में बघेल ने कहा कि आदिवासियों के मामले में पुलिस लगातार काम कर रही है। इन मामलों में तेज कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्तियों के विरूद्ध में दर्ज प्रकरणों की वापसी के साथ ही नक्सल प्रकरणों के त्वरित निराकरण की समीक्षा की गई। अफसरों ने बताया कि आदिवासियों के विरूद्ध दर्ज प्रकरण वापसी के लिए गठित न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक समिति की अनुशंसा पर 632 प्रकरणों में 752 आदिवासी के विरूद्ध दर्ज केस (प्रकरणों) की वापसी की गई है। बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव गृह सुब्रत साहू, डीजीपी अशोक जुनेजा, महानिदेशक नगर सेना अरूण देव गौतम, पुलिस महानिरीक्षक (गुप्तवार्ता) आनंद छाबड़ा उपस्थित रहे।

811 प्रकरणों की हुई शीघ्र सुनवाई

इसी तरह वर्ष 2019 के पहले नक्सल अपराधों में गिफ्तार स्थानीय आदिवासियों के न्यायालय में विचाराधीन प्रकरणों के त्वरित निराकरण किया गया है। अभी तक 811 प्रकरणों में कुल 1244 स्थानीय आदिवासी लाभांवित हुए हैं। इनके प्रकरण न्यायालय से समाप्त हुए।

लगभग 23 हजार प्रकरण थे विचाराधीन ।

कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में निर्दोष आदिवासियों को रिहा करने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद अप्रैल 2019 में मामलों की समीक्षा शुरू हुई। उस वक्त करीब 23 हजार प्रकरण थे। इसमें 6,743 विचाराधीन मामले में 1,039 के खिलाफ नक्सल मामले दर्ज थे। वहीं, राज्य की विभिन्न् जेलों में बंद 16,475 आदिवासी में से 5,239 नक्सली मामलों में आरोपित थे। इनमें ऐसे आदिवासी ऐसे भी थे जो गरीबी या कानूनी मदद नहीं मिलने के कारण गिरफ्तारी के खिलाफ अपील तक नहीं कर पाए।

साल 2019 में बनाई गई थी पटनायक कमेटी , छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस एके पटनायक की अध्यक्षता में साल 2019 कमेटी गठित किया गया है जो बस्तर के जेलों में बंद आदीवासियों की रिहाई पर तीन बिंदुओं के आधार पर समीक्षा कर सरकार को रिपोर्ट भेज रही है । नक्सल से जुड़े मामले को भी दो वर्गों में बांटा गया है, पहला खुद हथियार उठाने का मामला और दूसरा जो भीड़ में शामिल रहे।

राज्य सरकार ने अप्रैल 2019 में मामलों की समीक्षा शुरू की; तब करीब 23 हजार मामले थे, इनमें से 6,743 विचाराधीन मामले में 1,039 के खिलाफ नक्सल मामले दर्ज थे। साथ ही राज्य की विभिन्न जेलों में बंद 16,475 आदिवासियों में से 5,239 नक्सली मामलों में आरोपित थे। जानकारी के अनुसार इनमें ऐसे आदिवासी भी शामिल थे, जो गरीबी या कानूनी मदद नहीं मिलने से गिरफ्तारी के खिलाफ अपील तक नहीं कर पाए। कुल मामलों में से करीब चार हजार मामलों को विचार के लिए कमेटी के सामने रखा गया, इनमें कई मामले बेहद सामान्य किस्म के थे। इसके बावजूद संबंधित आदिवासी 17 वर्ष से अधिक समय से जेलों में बंद थे। कमेटी ने चार हजार में से भी 1,141 को विचार करने के लिए रखा।

जून 2021 में लिये गए फैसले से 726 लोगों को मिला सीधा लाभ

जून 2021 में मिली जानकारी न्यायालय के माध्यम से आदिवासियों के विरुद्ध दर्ज प्रकरणों की वापसी के लिए जस्टिस एके पटनायक कमेटी के समक्ष रखे गए. इनमें से समिति ने 627 केस वापस लेने की सिफारिश की। पटनायक कमेटी की सिफारिश पर प्रदेश सरकार ने 594 मामलों को वापस लिया. इस फैसले से 726 लोगों को सीधा लाभ मिला. वहीं अभी भी 33 मामले अदालत में वापस लेने के लिए लंबित हैं।

718 मामले वापस लेने का सरकार कर रही दावा

पुलिस विभाग द्वारा 365 नक्सल मामलों को न्यायालय में स्पीड ट्रायल के लिए भेजा गया. इनमें से न्यायालय द्वारा 124 मामलों को दोष मुक्त करते हुए 218 आरोपियों को लाभान्वित किया गया. इस तरह प्रदेश सरकार 31 मई 2021 तक 944 निर्दोष आदिवासियों के खिलाफ दर्ज 718 मामले वापस लेने का दावा कर रही है। लेकिन अब भी ऐसे ही मामलों में जेलों में बंद करीब हजारों आदिवासी रिहाई के इंतजार में हैं. इसको लेकर आदिवासी समाज का एक वर्ग सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहा है।

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By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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