कल्याणपुर (छत्तीसगढ़) hct : प्रदेश के सूरजपुर जिलान्तर्गत कल्याणपुर में मनरेगा मजदूरी और आवास योजना में घोटाला करने वाले पंचायत सचिव चंदन गुप्ता को हटाने की मांग को लेकर आदिवासी एकता महासभा के नेतृत्व में पिछले 39 दिनों से चल रहा धरना पंचायत सचिव को हटाने का आदेश जारी होने के बाद समाप्त हो गया। मीडिया के लिए इस आदेश की प्रति जारी करते हुए अब आदिवासी एकता महासभा ने पीड़ित मजदूरों की मजदूरी और आवास योजना के प्रभावित हितग्राहियों की राशि का शीघ्र भुगतान करने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि चंदन गुप्ता ग्राम पंचायत पाठकपुर के सचिव होने के साथ ही कल्याणपुर ग्राम पंचायत का भी प्रभार संभाल रहे हैं। उन पर मनरेगा मजदूरी और आवास राशि के भुगतान में घोटाला करने की शिकायत इन पंचायतों के ग्रामीणों ने सूरजपुर जनपद के कार्यपालन अधिकारी से की थी, लेकिन उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही थी।

ग्रामीणों ने जनपद सदस्य किमलेश, सरपंच परमेश्वरी सिंह, पूर्व जनपद सदस्य बाल सिंह, पूर्व सरपंच सुरेंद्रलाल सिंह तथा आदिवासी एकता महासभा व छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेताओं ऋषि गुप्ता, माधो सिंह, प्रदीप कुमार, भीम सिंह, जगदास, अलीराम राजवाड़े, केदार राजवाड़े, पारसनाथ सिंह, सुख साय, महेश, विमल सिंह, मन बोध, राजेश कौशिक, वेदनाथ राजवाड़े, बीरबल आदि के नेतृत्व में आंदोलन शुरू कर दिया था तथा…

अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन धरना में बैठ गए थे। धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं भी हिस्सेदारी कर रही थी। आंदोलनकारी नेताओं ने कई बार जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों से मिलकर दोषी सचिव के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की थी।

घोटालेबाज सचिव के हटते ही
आंदोलनकारियों का चक्का जाम विजय जुलूस में बदल गया

आदिवासी एकता महासभा द्वारा चक्का जाम की घोषणा की गई थी और महिलाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए थे, लेकिन चक्का जाम आंदोलन के पहले ही तहसीलदार लटोरी ने उन्हें सचिव को हटाने की जानकारी दी। यह जानकारी मिलते ही आंदोलनकारियों का चक्का जाम विजय जुलूस में बदल गया। विजय जुलूस के बाद धरना स्थल पर आम सभा की गई तथा अनशनकारियों को जूस पिलाकर धरना समाप्त करने की घोषणा की गई।

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By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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