Judiciary

धारा 151 की गलत व्याख्या आरोपी को जेल भेज रहे अफसर !

1 नवंबर 2010 को दोष पूर्ण न्यायालय प्रक्रिया में किए गए संशोधन के अनुसार धारा 151 में पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपी को थाने से ही जमानत की व्यवस्था है, लेकिन संशोधन से अंजान पुलिस इस धारा में गिरफ्तार आरोपी को दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन के 7 वर्ष बाद भी न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया में समय गंवा रही है। इतना ही नहीं 151 की सुनवाई करने वाले कार्यपालक मजिस्ट्रेट कानून के विपरीत जाकर आरोपी को जेल भी भेज रहे हैं। जबकि इस धारा में जेल भेजने का प्रावधान ही नहीं है।

myself in supreem court
मानवाधिकार का हनन, क्षतिपूर्ति का है अधिकार
धारा 151 के तहत अब तक कई आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि यह गंभीर न्यायिक त्रुटि है। पीड़ित मनमानी को चुनौती देकर क्षतिपूर्ति पाने का भी अधिकार रखता है।
क्या इस धारा में जेल भेजा जाता है ?

सीआरपीसी की धारा 151 के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को न्यायिक अभिरक्षा में जेल नहीं भेजा जाता है, बल्कि केवल पुलिस हिरासत में रखा जाता है। पुलिस ऐसी गिरफ्तारी करके व्यक्तियों के संबंध में रजिस्टर में जानकारी अंकित करती है और उन्हें पुलिस थाने में बने हुए हवालात में रखती है पर यहां ध्यान देना होगा कि भले ही पुलिस धारा 151 के अंतर्गत किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करें उसे किसी भी सूरत में 24 घंटे से ज्यादा हवालात में नहीं रखा जा सकता। 24 घंटे होने के पूर्व पुलिस को ऐसे गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को छोड़ना ही पड़ता है क्योंकि यह किसी भी व्यक्ति को मिला एक संवैधानिक अधिकार है।

क्या धारा 151 में जमानत की आवश्यकता होती है?

जब कभी पुलिस धारा 151 के अंतर्गत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी करती है तब ऐसी गिरफ्तारी केवल 24 घंटे तक के लिए होती है। धारा 151 में कहीं भी प्रतिभूति या बंधपत्र का उल्लेख नहीं किया गया है। यह धारा पुलिस को केवल गिरफ्तार करने की शक्ति देती है इस धारा में कहीं भी जमानत जैसी बात का उल्लेख नहीं है पर व्यवहार में ऐसा नहीं होता है।

जेल संचालक भी कर रहे गलती

2010 में संशोधित हुए कानून के माध्यम से यह भी बताया कि धारा 151 में गिरफ्तार आरोपी को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास भेजा जा रहा है। जहां से जेल भेज दिया जाता है। जबकि 151 में किसी भी आरोपी को जेल भेजना अवैधानिक तो है ही जेल संचालक को भी जेल में रखने का अधिकार नहीं है।

कब हो सकती है जेल ?

धारा 151 में पुलिस गलत इस्तागासा लगाती है, जबकि कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोपी को तब ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब आरोपी धारा 151 (2) में गिरफ्तार हुआ हो और आरोपी को 24 घंटे से अधिक पुलिस अभिरक्षा में रखना आवश्यक हो तो किसी विधि अथवा संहिता के उपबंधों के अधीन प्राधिकृत करना होगा, तब धारा 151, 107 व 116 में पुलिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समझ आरोपी को पेश कर सकती है।

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Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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