SP बिलासपुर व मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

बिलासपुर। नफरत फैलाने वालों, भाईचारे को तोड़ने वालों के संघी सरकारों और सत्ता ने नेताओ के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही व असंवैधानिक सभाओं पर अविम्लब रोक लगाए जाने को लेकर संविधान प्रेमी नागरिकगण का प्रदर्शन, व SP बिलासपुर व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में सवाल उठाया गया कि कोई भी जनप्रतिनिधि जिसने संविधान की शपथ लेकर सेवा देने की बात कही, वो आखिर कथित धर्म संसद जैसे कार्यक्रम को कैसे आयोजित व उसमे शामिल हो सकता है ? यह पूरे तरह से संविधान के विरुद्ध है।

ज्ञापन में दोषी विकास उपाध्याय, राम दास सुंदर, प्रमोद दुबे, ज्ञानेश शर्मा सहित कांग्रेस के नेताओ पर और शामिल नेताओ और लोगो पर कार्यवाही की मांग की गई है, साथ ही यह भी मांग उठाया गया है कि सरकार अखबारों में विज्ञापन देकर सार्वजनिक आम जनता से माफी मांगे, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अलावा जिन्होंने देश की आज़ादी से लेकर बड़े बड़े योगदान दिए, उनके बारे में अवगत कराते हुए बड़े बड़े कार्यक्रम करवाया जाना चाहिए।

प्रदर्शन में नंद कश्यप, लखन सुबोध, श्याम मूरत कौशिक, नीलोत्पल शुक्ला,आनंद मिश्रा, आशिफ भाभा, सुखउ निषाद, वाहिद सिद्दीकी, राजिक अली,वीरेंद्र भारद्वाज, भाव सिंह चतुर्वेदी,अजय अनंत,महेश , रूपदास टन्डन, दिनेश सतनाम, गौतम कुर्रे, मिश्रीलाल खण्डेय, आदि लगभग 60-70 लोग शामिल हुए।

शामिल लोगो ने मिलकर बिलासपुर पुलिस प्रशासन के द्वारा थाना सिविल लाइन थाने पहुँचकर घेराव करके थानेदार महोदय के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

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जारीकर्ता
प्रियंका शुक्ला
अधिवक्ता
8871067410

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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