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बालोद (hct)। छत्तीसगढ़ प्रदेश, जहाँ पत्रकारिता कठिन ही नहीं बल्कि एक चुनौती मानी जाती है। प्रदेश में इन्हीं चुनौतियों को देखकर प्रदेश के पत्रकारों ने तत्कालीन भाजपा शासन काल से प्रदेश में “पत्रकार सुरक्षा कानून” लागु करने को लेकर लम्बे समय से मांग करते आ रहे हैं। वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने अपने लफ्फाजी घोषणा पत्र में; प्रदेश के आदिवासी, किसान और पत्रकारों को मक्कारी के जाल में फांसकर सत्ता तो हासिल कर लिया, लेकिन बहुत जल्द ही उसके इस दोगली नीति का राजफाश हो गया…

इन दोनों राजनीतिक दलों ने यह साबित कर किया कि घोषणा 5 साल की लिए किया जाता है उसे पूरा करना और नहीं करना इनके नियत में शामिल नहीं होता कहने का तात्पर्य यह कि भाजपा और कांग्रेस एक ही थाली के चट्टे – बट्टे हैं और उनकी कथनी और करनी में जमीन – आसमान का फर्क होता है। कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश में “पत्रकार सुरक्षा कानून” लागू करने की बात कही थी, हालांकि यह कानून प्रदेश में सत्य के लिए काम करने वाले पत्रकारों के लिए कितना लाभदायक साबित होगा यह कहा नहीं जा सकता।

ज्ञात हो, कि छत्तीसगढ़ राज्य में कांग्रेस पार्टी के सरकार बनने के पहले से प्रदेश के अनेक पत्रकारों के साथ अन्याय और अपराध होते आया है, जिसकी बानगी बालोद जिला के कवंर चौकी क्षेत्र में दिनांक 05/10/2021 को फिर देखने को मिला, समाचार पत्र “हाईवे क्राइम टाइम” और मासिक पत्रिका “प्रचंड छत्तीसगढ़” के वेब संस्करण से जुड़े बालोद जिला प्रतिनिधी को जो सामान खरीदकर अपनी बाईक से घर लौट रहे थे, इसी दौरान आदर्श ग्राम पंचायत कवंर के आबादी पारा स्थित सड़क के ब्रेकर के पास खड़े कुछ युवकों ने बाइक रोकने का इशारा किया, जब दोनो पत्रकारों ने बाइक रोक कर रोके जाने का कारण पूछा तो उत्पाती युवकों ने अचानक उन पर हमला कर दिया।

विगत दिनों पूर्व जशपुर जिले के पत्थलगांव की घटना भी गांजा तस्करों के द्वारा अंजाम दिया गया था; जिसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेश के पुलिस विभाग में पदस्थ आला अधिकारियों से मिंटींग के दौरान प्रदेश में “गांजा की एक पत्ती भी नहीं आना चाहिए” जैसे सख्त लहजे में पुलिस विभाग के अधिकारियों से कहा गया था। मुख्यमंत्री के उक्त उद्बोधन से अतिउत्साहित पत्रकारद्वय विनोद और अमित द्वारा इलाके में गांजा के अवैध कारोबार को लेकर समाचार संकलित किया जा रहा था।

जिसकी जानकारी बालोद पुलिस अधीक्षक को उनके वाट्सएप नंबर पर भी प्रेषित की गई थी साथ ही यह भी इंगित किया गया था कि इस अवैध गतिविधि में विभाग के कुछ संगठित ठोले भी अंजाम देने में लगे हुए हैं। लेकिन; इस कारोबार के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले पत्रकारों पर हमला यह साबित करती है कि पुलिस प्रशासन को उनके अवैधानिक कृत्य में पत्रकारो का हस्तक्षेप नागवार गुजरा।

अवगत हो कि, ग्राम पंचायत अरकार के पूर्व व वर्तमान सरपंच पति भी कवंर चौकी पर पदस्थ चौकी प्रभारी को कुछ दिन पहले ही गांजा की खुलेआम व्यापार रोकने हेतू निवेदन किया गया था। एक विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि पुलिस को गांजा कारोबार से संबंधित विषयों पर पूरी जानकारी है लेकिन ने कार्रवाई नहीं करते है।

पत्रकारों पर हमला; मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ मामूली जमानती धारा लगाकर दोबारा अपराध कारित करने का मौका दिया जाना, शायद यह इंगित करता है कि; ‘हे आरोपियों, तुम्हें मौका दिया गया था; निपटाने का, मगर तुम असफल हुए; अबकी बार कोई चूक नहीं होने को मांगता।’ उत्पाती हमलावरों के द्वारा विनोद नेताम के सर पर अंदरूनी चोट की आशंका देख सरकारी डाक्टर ने सीटी स्कैन की जरूरत बताई है, मामले में 36 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिला पुलिस प्रशासन ने सीटी स्कैन नही करवाया है हालांकि की कवंर चौकी में पदस्थ एक ईमानदार पुलिस अधिकारी ने सुबह फोन कर हालचाल जाना और सीटी स्कैन से संबंधित विषयों पर बात किया।

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