विनोद नेताम
(संवाददाता)
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बालोद (hct)। जिले के जंगलों में जब से गजराज हाथियों के दल का आगमन हुआ है, तब से जिला के ज्यादातर वन क्षेत्रों के ग्रामों में दहशत व्याप्त है। ग्रामीण सुबह – शाम हाथियों के आने जाने के साथ ही उनके हलचल पर नजर रखें रहते है। जिला में काफी दिनों से गजराजों का दल दहशत मचा रहे है। हाथियों का दल जिस जंगल से होकर गुजरता है उस क्षेत्र के नागरिक रात में हाथियों के द्वारा कितना नुकसान पहुँचाया गया है यह पता करने पहुंच जाते हैं।

रोज इन क्षेत्रों में हाथियों से जुड़ी नई खबर रहती हैं। कुछ ऐसी ही एक खबर आज सुबह सुर्खियां बन गई जब लोगों को पता चला कि एक नवजात हाथी घायल हो कर लंगड़ाते हुए चल रहा है। यह खबर दल्ली – राजहरा के खल्लारी गाँव के खेत से निकल कर गांव में और गांव से जिला तक आग की तरह फैल गई…

जिम्मेदारों को पहुंचने में बारह बज गए

ग्रामीणों ने घायल शावक हाथी की खबर, वन विभाग को तत्काल दे दिया। लेकिन वन्यप्राणी संरक्षण अभियान के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करने वाले विभाग के अधिकारी आराम से आम आदमी के मेहनत से कमाई हुई पैसों का अनाज खा-डकार कर लगभग 12.00 बजे के आसपास पहुंचे, तब तक हाथी का बच्चा घायल अवस्था में दर्द के मारे तड़पता रहा। विभाग के जिम्मेदार अधिकारीयों को इस बात का जरा भी इल्म नहीं कि; वन्यप्राणी संरक्षण और जंगल की सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी ही नहीं कर्तव्य भी है और इस कर्तव्यपरायणता की परितोषक बतौर तनख्वाह (बे)ईमानदारी से निभाने की बदौलत हर माह की पहली तारीख को इन किंकर्तव्यविमूढ़ लोगो के खाते में प्रदान कर दिया जाता है और उन नामुरादों को जो तन-खा ये मूढ़मति सरकार देश के मेहनतकश करदाताओं से प्राप्त टैक्स का पैसा पानी की तरह बहाती है।

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वन विभाग की लापरवाही उजागर।

हाथियों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारीयों और कर्मचारियों के कंधे पर है। लेकिन; प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह तत्परता से नहीं निभा रहे है इसमें कोई दो राय नहीं है। आज से तीन दिन पूर्व, गुरूर वन मंडल परिक्षेत्र में एक जंगली सूअर सड़क दुघर्टना में मारा गया यह कोई पहली और आखरी घटना नहीं है इस तरह की घटना / दुर्घटना का शिकार जिला के वन्यप्राणी होते रहते हैं खामियाजा प्रशासन को उठाना पड़ सकता है; ऐसा कहा जा सकता है। लेकिन यह बात सत्य नहीं दरअसल हाथियों का असली उत्पात जिन्होंने ने झेला है वे लोग इस क्षेत्र में रहने वाले नागरिक है। भला वन विभाग को आम नागरिकों के दुख और तकलीफों से क्या वास्ता ?

ठन्डे बस्ते में समा गया “‘लेमरू प्रोजेक्ट”

विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस पार्टी ने “लेमरू प्रोजेक्ट” निर्माण की बात कही थी, जिसमें हाथियों के लिए स्थाई आवास बनाने की दावा तक किया गया था। लेकिन; पार्टी के कद्दावर नेता, टी एस सिंहदेव इस प्रोजेक्ट के खिलाफ है ऐसी गलियारों में कानाफूसी होते आई है।

दल्ली राजहरा क्षेत्र के खल्लारी गाँव में जो घायल नवजात हाथी मिला, उसको घायल अवस्था में देखकर गाँव के लोग भयभीत हो चुके थे। ग्रामीणों ने वन विभाग को सुबह ही जानकारी दे दी गई थी कि; तत्काल मौका-ए-स्थल पर पधारें, शावक हाथी घायल होकर पड़ा है। इसके बाद भी वन विभाग के जिम्मेदारों के कान में जूं तक नहीं रेंगा…! बाबू साहब लोग जिम्मेदारी भूलकर आराम से आये तब तक नवजात हाथी दर्द में तड़पता हुआ खेतों में पड़ा रहा…!!

ग्रामीण, वन विभाग के अधिकारियो के इंतजार में तमाशबीन बनकर हाथी को तड़पते हुए देखते रहे। जिसके बाद अंततः दोपहर में रायपुर से डॉक्टरों टीम आने के बाद वन विभाग बालोद। रेंज दल्लीराजहरा रेंज और डौण्डी रेंज के अधिकारी बालोद वन विभाग और पशुपालन, बालोद-दल्ली के साथ पहुँची जिसके बाद घायल हाथी का उपचार हो पाया जिसे बाद में सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया।

किसानों में आक्रोश व्याप्त है।

वन विभाग बालोद की सुस्त रवैये के चलते किसान; बहुत ही ज्यादा परेशान है। किसान, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के ऊपर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि, वन विभाग सिर्फ हाथियों पर नजर रखने की बात करता है। किसानों को नुकसान से बचाने के लिए कोई कारगार कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिसके कारण हाथियों के आने से उनके फसल लगातार चौपट हो रहा है। इनसे बचने के लिए आक्रोशित किसानों द्वारा आतिशबाजी की जाती है। जिससे हाथियों का दल उग्र हो रहा है, जो लगातार अपना आशियाना बदलने पर मजबूर हैं।

किसानो को हाथियों से छुटकारा दिला पाने में वन विभाग फिसड्डी साबित हो रही है। रात होते ही वन विभाग; गाड़ियों के माध्यम से सिर्फ पेट्रोलिंग करते है। लेकिन ग्रामीणों को सुरक्षित रखने, फसलों को बचाने के लिए सिर्फ पहल करने का आश्वासन दिया जाता है। वहीं किसानों को चौपट फसलों के मुआवजा देने के नाम पर प्रशासन द्वारा हितग्राही किसानों को झुनझुना पकड़ा रहा है। जो किसानों के साथ न्याय संगत नहीं है।

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