Ad space

बालोद (hct)। बालोद जिला जिसकी शरहद धमतरी जिला, कांकेर जिला, राजनांदगांव और दुर्ग जिला से मिलती है। जिला में वन संपदा और संसाधन की भरमार है यह कहा जा सकता है। जिला के ज्यादातर वन ग्रामों में आदिवासी समुदाय से जुड़े हुए लोग निवास करते हैं। अमूमन बस्तर में हम जिस सभ्यता और संस्कृति की विरासत देखते हैं ठीक उसी तरह बालोद जिला के ज्यादातर वन ग्रामों में देखने को मिलता है।

वन विभाग बालोद जिला में वन संरक्षण और वन्य प्राणी सुरक्षा हेतू कटिबद्ध है और विभाग अपनी जिम्मेदारियों को निभाने हेतू सजग है यह कहा जाता रहा है, लेकिन जिला में वन विभाग बालोद की वन संपदा और संसाधन की सुरक्षा के दावे कई बार खोखली नजर आती है। जिला में घटती जंगल व कटते वृक्ष प्रत्यक्ष प्रमाण हैं और प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती है यह माना जा सकता है।

Donate button (Touch & Pay)

वनों में जंगली जानवर सुरक्षित नहीं ,वन विभाग बालोद के द्वारा वन्यजीवो की गणना पर अब सवाल खड़े हैं, जिस विषय पर बालोद वन विभाग की बोलती अक्सर बंद रहती है। वन्यजीव गैर जंगली क्षेत्र व शहरी क्षेत्रों में खुलेआम घूम रहे है यह कोई नई बात नहीं है। जंगली सुअर के द्वारा जिलावासियों पर हमला कोई नई बात नहीं है अक्सर हम सब ने खबरों के माध्यम से या फिर प्रत्यक्ष रूप से जंगली सुअरो की झूंड को खुलेआम टहलते हुए देखा होगा। जंगली सूअर अपने नाम की तरह वन्यप्राणी है जो कि जिला के जंगलों से निकल कर रिहायशी और आबादी क्षेत्र में विचरण करते हैं। जिसके चलते कई दफा इंसानों से भिड़ंत होते रहती हैं और लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है; जबकि वन्यप्राणीयो की सुरक्षा से संबंधित सभी जिम्मेदारी वन विभाग बालोद की है।

वन्यजीव संरक्षण अभियान जिला में लगातार दम तोड़ रही है जबकी वन विभाग बालोद के अधिकारी वन विभाग बालोद के कार्यलय में बैठ कर कुर्सी तोड़ रहे है यह कहा जा रहा है और क्यों कहा जा रहा है और किसके द्वारा कहा जा रहा है यह जाने। दरअसल नेशनल हाईवे 30 पर आज एक जंगली सूअर किसी अज्ञात वाहन से टकराकर मर गया। मृत जंगली सूअर को वन मंडल गुरूर के अधिकारियों व कर्मचारियों ने जप्त कर विभागीय जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया है, लेकिन वनप्राणीयो की इस तरह की सड़क दुघर्टना कोई नई बात नहीं है जबकि वन विभाग बालोद जिला के जंगलों में फेंसिंग तार लगवाने के नाम पर करोड़ों रूपए खर्च कर दिया है, फिर जंगली जीव सुरक्षित नहीं है जिसे देखकर लोग वन्य सुरक्षा के दावे को खोखला होने की बात कह रहे है।

whatsapp group

ad space

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here