विनोद नेताम
(संवाददाता)
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बालोद। जिले के अंतर्गत दैहान तरौद से ‌बायपास रोड निर्माण प्रस्तावित है, इस रोड निर्माण / चौड़ीकरण में या कह सकते हैं कि “विकास” में लगभग 2900 छोटे – बड़े पेड़ बाधा बन गए हैं जिसको काटा जाना प्रस्तावित है। प्रकृति की ये अनमोल उपहार मनुष्यों को मुफ्त में मिली हुई है उसकी कद्र करना उनके वश की बात नहीं।

विगत दो साल से देश – दुनिया एक अदृश्य महामारी कोरोना के चपेट में हैं और इस महामारी ने मानव जीवन में जो त्राहिमाम मचाया हैं उस महामारी में काल के ग्रास जो बने हैं उसका मुख्य कारण जो रहा है वो है ऑक्सीज़न और यही ऑक्सीज़न इन बेजुबान पेड़ – पौधों से हमें बिना किसी भेदभाव के सबको बराबर मिलता रहा है। ये वृक्ष, ये पौधे ना तो बोलते हैं और न ही अपनी पीड़ा व्यक्त कर सकते हैं।

वृक्षारोपण के ढोंगी एक पौधा रोपते समय दस – दस हाथ लगाकर दांत निपोरते हुए फोटो सेशन करवाते सेल्फी लेते हैं, और आज एक नहीं बल्कि हजारों की संख्या में इन वृक्षों को काटा जा रहा है तो ये गधे के सर से सींग की तरह गायब हैं !

विकास में बाधा बने वृक्षों – पौधों को काटा जायेगा और भ्रष्टाचार की एक नई इबारत लिखी जानी है जिसको बचाने के लिए जिले के पर्यावरण प्रेमियों ने बीड़ा उठाया है, लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में रविवार दिनांक 18 जुलाई को गुंडरदेही विकासखंड के सैकड़ों की संख्या में महिलाओं बच्चों और युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण संबंधित स्लोगन का नारा लगाते हुए रैली निकाली और बायपास रोड बनने के लिए चिन्हांकित किये गये पौधों को रक्षा सूत्र बांधा गया। इस रैली में जिला के पर्यावरणप्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सक्रीय चेहरे भी शामिल थे।

तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल

धर्मशास्त्र के विद्वानों के अनुसार इस मंत्र का अर्थ यह है कि, रक्षा सूत्र बांधते समय ब्राह्मण अपने यजमान को कहता है कि; जिस रक्षासूत्र से दानवों के महापराक्रमी राजा बलि धर्म के बंधन में बांधे गए थे अर्थात् धर्म में प्रयुक्त किए गये थे, हे रक्षे ! उसी सूत्र (बंधन) से मैं तुम्हें बांधता हूं, यानी धर्म के लिए प्रतिबद्ध करता हूं। हे रक्षे तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना।

भोज साहू पर्यावरण प्रेमी व ग्रीन कमांडो विरेन्द्र सिंह ने बताया कि, हम लोगों के द्वारा लगातार इस तरह के अभियान चलाकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। हमने सरकार तक यह सन्देश देने के उद्देश्य से “चिपको आंदोलन” से जुड़े प्रतीकात्मक आंदोलन भी चलाये; उसी कड़ी में हमारे द्वारा “रक्षा सूत्र” बांधकर पेड़ पौधों की सुरक्षा निश्चित कर करने पर बल देते हुए शासन प्रशासन से मांग कर रहे हैं। यह मुहीम आगे भी जारी रहेगा जिसकी आगामी कड़ी में प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री,वन मंत्री को पत्र लिखकर वृक्षों को नहीं काटने का मांग करेंगे। साथ ही विकासखंड स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करेंगे। कोरोना काल में लोगों को आक्सीजन की किल्लत के बारे में लोगों में हाहाकार मचा हुआ है और एक तरफ इस तरह बालोद जिला प्रशासन पेड़ों को बचाने के बजाए काटने पर उतारू हो रहा है।

कविता प्रवीण गेंडरे (सामाजिक कार्यकर्ता) ने इस सम्बन्ध में बताते हुए कहा कि हम हर साल रक्षाबंधन का पर्व मनाते हैं और अपने भाइयों की कलाई में राखी (रक्षा सूत्र) बांधकर उनकी मंगल कामना के साथ विपत्ति में अपनी रक्षा के प्रति निश्चिन्त हो जाते हैं उसी प्रकार हमने इन बेजुबान वृक्षों और छोटे पौधों को अपना भाई बनाकर उसे रक्षा सूत्र में पिरोया है, और उसके रक्षा के लिए विनती करते हैं। हमने अपने पर्यावरण संरक्षण के लिए दैहान-तरौद जंगल को कटने से बचाने के लिए शासन प्रशासन से मांग कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से वीरेंद्र सिंह ग्रीन कमांडो, भोज साहू पर्यावरण प्रेमी, कविता गेन्द्रे सामाजिक कार्यकर्ता, दीपक थवानी सामाजिक कार्यकर्ता ,पिलेश्वर साहू, नोम साहू, गायत्री साहू नैना साहू जयप्रकाश जयसवाल शुभम साहू प्रशांत बड़ी संख्या में ग्राम तरौद की महिलाएं बच्चे सहित जिला के पर्यावरण प्रेमी उपस्थित थे।

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