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दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने आज से एक सप्ताह पूर्व सोशल मीडिया (social media) के मार्फ़त एक जानकारी साझा (share) करते हुए यह बताया था कि, “गीदम थाना क्षेत्र में नक्सली गतिविधि की सूचना के बाद डीआरजी के दल को गश्त पर रवाना किया गया था, दल जब गुमलनार गांव के जंगल में था; तब नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। कुछ देर तक दोनों ओर से गोलीबारी के बाद नक्सली वहां से फरार हो गए। बाद में जब सुरक्षाबलों ने घटनास्थल की तलाशी ली तब मुठभेड़ वाले स्थान पर एक महिला नक्सली का शव बरामद किया गया।”

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि, महिला नक्सली बीजापुर जिले के भैरमगढ़ क्षेत्र की निवासी थी। वह पीएलजीए (People’s Liberation Guerrilla Army) की प्लाटून नंबर 16 की सदस्य थी। उस पर दो लाख रुपये का इनाम था। पल्लव ने बताया कि सुरक्षाबलों ने घटनास्थल से दो देशी (कट्टा और भरमार) बंदूक, दो किलोग्राम वजनी बारूदी सुरंग और अन्य सामान बरामद किया है। यह खबर तमाम छोटे – बड़े मीडिया की सुर्ख़ियों में रहा…

बता दें कि मृतक तथाकथित महिला नक्सली का नाम पाईके वेको, उम्र लगभग 24 वर्ष था। जिसके पीछे का राज 31 मई को, विकास (रानू) तिवारी; अपने यूट्यूब चैनल “बस्तर टॉकीज” के माध्यम से इस मुठभेड़ पर से काफी कुछ पर्दा हटाते हुए अनेक सवाल छोड़ रखे हैं…
देखिए वीडियो :

दो लाख की इनामी महिला नक्सली को मार गिराने के दावे पर गाँव के सरपंच और पूर्व सरपंच ने लगाया आरोप
कहा घर पर सोई थी, उठाकर नदी किनारे ले जाकर गोली मार दिए जवान

मृतिका के सम्बन्धी 06 जून को थाना नेलसनार के नाम एक शिकायती पत्र लेकर आए हैं। इस बात को लेकर बीबीसी के छत्तीसगढ़ राज्य प्रतिनिधि आलोक पुतुल, अपने ट्विटर हेंडल पर कमेंट्स करते हुए लिखते हैं :-

पत्र के हवाले से ज्ञात होता है कि नीरम गांव की निवासी पाईके वेको घटना दिनांक 30 मई 2021 वाली रात पाईके अपनी माँ सुक्की और पड़ोस के एक बच्चे मोहन के साथ घर के आंगन में सो रही थी कि रात्रि लगभग 11 से 12 बजे के बीच डीआरजी के जवान जिनकी संख्या का उन्हें अँधेरा होने की वजह से अंदाजा नहीं लगा पाए उनके घर को चारो तरफ से घेर लिया गया था और उनमे से कुछ जवान उनके घर के आँगन में घुस गए; उसमे दो महिला भी थी जिनमे से एक को पाईके की माँ सुक्की ने पहचान लिया जिसका नाम जेओ अटामी के तौर पर कर रही है। बाकी के जवान जिनकी पहचान आसपास के गांव के निवासी के तौर पर हुई है जो आत्मसमर्पित हैं और 2 – 3 साल से डीआरजी में भर्ती हो गए।

सिलगेर (नरसंहार) आंदोलन के चलते यह घटना पुलिस के लिए दूध-भात साबित हुई।

गौरतलब यह कि, आदिवासियों (ग्रामीणों और ग्राम प्रमुख) के द्वारा कहा जा रहा है कि, घटना दिनांक 30 मई को सुरक्षा बल के जवानों ने आधी रात घर में घुसकर महिला को उठाया, उसके साथ बलात्कार किया, फिर हत्या कर दी। जानकारी मिली हैं कि मारी गई युवती की शादी भी होने वाली थी। अब सवाल यह उठता है कि जिस नक्सली के सर पर दो लाख का इनाम हो; वह क्या एक देशी कट्टा और भरमार बन्दुक से आपके एसएलआर (self loading rifle) से लैस जवानों के साथ कैसे मुठभेड़ करेगी ? खैर ये खेल तो बस्तर के विवादित पुलिस एस आर पी कल्लूरी के समय से चल रहा है, कि नक्सलियों को वर्दी के अंदर से गोली लग जाती थी और उसके वर्दी में गोली लगने का एक निशान भी नहीं पाया जाता था और अब तो साहब; आपकी पुलिस के जवान इतना प्रशिक्षित हो चुके हैं कि 5000 की भीड़ में तीन माओवादियों को खोज कर मार गिराती है…!

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