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*इसे छत्तीसगढ़ का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि अपने अस्तित्व में आते ही प्रदेश की सत्ता; दमनकारी और हिटलरशाही सोंच रखने वाले लोगो के हाथों में रही। जब-जब चुनाव हुआ, सिर्फ आदिवासी या छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री की ही मांग उठती रही, मगर सत्ता की बागडोर विवादस्पद मुख्यमंत्री से लेकर आज तक गैर छत्तीसगढ़िया के हाथो ही रहा। छत्तीसगढ़िया होने का झांसा देकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सत्तारूढ़; मान. भूपेश बघेल भी ठेठ छत्तीसगढ़िया न होकर गुजरात से भागकर आए हुए सोलंकी वंश से ताल्लुकात रखते हैं।
पढ़िए :  https://highwaycrimetime.in/archives/5760

सिर्फ गेड़ी चढ़कर या भौंरा चलाकर कोई छत्तीसगढ़िया नहीं बन जाता साहब, उसके लिए छत्तीसगढ़ की मिट्टी से लगाव होना भी जरुरी है। अगर ऐसा होता; तो विगत तीन दिनों से कबीरधाम के “धरमपुरा” में जो हो रहा है उस पर एकतरफा कार्रवाई न किया जाकर न्याय होता और…   *दिनेश सोनी। 

डेस्क (hct)। छत्तीसगढ़ प्रदेश के कबीरधाम जिला, पूर्व मुख्यमंत्री मान.रमन सिंह के गृह नगर कवर्धा के ग्राम धरमपुरा में शुक्रवार अल सुबह 8 बजे अवैध कब्जा हटाने गई भूपेश सरकार द्वारा सतनामी समाज के लोगों पर बर्बरतापूर्वक कार्यवाही के बाद सतनामी समाज उद्वेलित हो गया है।

ज्ञात सूत्रों के द्वारा बताया गया कि कुल सरकारी जमीन 5.39 एकड़ है; जिसमे से 5.19 एकड़ में हिन्दू समाज के लोगों ने कब्जाकर मंदिर और अन्य भवन बनवा लिए हैं। सतनामी समाज ने बची हुई मात्र 20 डिसमिल जमीन को 5-7 वर्ष पहले घेर कर जैतखाम और भवन स्थापित करने के लिए सुरक्षित रखा था और अब सामाजिक सहयोग से वहां एक सामाजिक भवन का निर्माण करवा रहे थे जिसमें गांव के अन्य समाज को ईर्ष्या और आपत्ति थी। उनकी शिकायत पर पहले भी कार्रवाई हुई थी पर समाज के लोगों को कोर्ट से स्थगन मिल गया था।

सवाल यह है कि, कार्रवाई केवल सतनामी समाज के भवन पर क्यों हुई ? क्या दूसरे समाज के द्वारा किया गया निर्माण विधिसम्मत है? यदि कार्रवाई होनी थी तो पूरे 5.39 एकड़ में निर्मित संरचनाओं पर होनी थी, केवल सतनामी समाज के मात्र 20 डिसमिल पर क्यों हुई? प्रशासन ने जिस अमानवीय और अदूरदर्शिता पूर्ण कार्रवाई की है वह घोर निंदनीय है। प्रशासन का काम ग्रामीणों के बीच सद्भावना उत्पन्न कर आपसी बातचीत से मामला सुलझाना था न कि एकपक्षीय कार्रवाई कर विष बोना। सरकार की मानसिकता है कि हर मसले को बलपूर्वक सुलझाया जाय !

धरमपुरा की इस घटना की जानकारी मिलते ही अमित जोगी और जेसीसीजे विधायक धरमजीत सिंह धरमपुरा पहुंचे। अमित जोगी ने कहा कि JCCJ हमेशा सतनामी समाज के साथ रहा था और आगे भी साथ खड़ा रहेगा। जोगी ने कहा कि, परमपूज्य गुरु बाबा घासीदास किसी समाज विशेष के नहीं; अपितु सभी समाज के पथ प्रदर्शक हैं। उनकी आस्था के केंद्र बिंदु सतनाम भवन और गुरुद्वारा को ध्वस्त कर न केवल सतनामी समाज बल्कि छत्तीसगढ़ के सभी समाज को आघात हुआ है। धरमपुरा जाने के पश्चात श्री धरमजीत सिंह और श्री अमित जोगी; कबीरधाम के मिनीमाता चौक में चक्का जाम में भी सम्मिलित हुए।

उन्होंने समाज के लोगों से मुलाकात की और कहा कि गांव में 5 एकड़ से अधिक जमीन पर अवैध कब्जा है, लेकिन कारवाई सिर्फ समाज विशेष पर की जा रही है। यह सरकार एक वर्ग विशेष के अस्तित्व को खत्म करना चाहती है। इसके अलावा उन्होंने कलेक्टर को बर्खास्त करने और दोषियों पर कड़ी कारवाई की मांग करते हुए जेसीसीजे की ओर से राज्य सरकार से ये 7 मांग की हैं –
1. कलेक्टर को तत्काल बर्खास्त किया जाए
2. समाज को ज़मीन वापस की जाए
3. समाज के लोगों के खिलाफ दर्ज FIR वापस ली जाए
4. कम से कम 5 करोड़ की लागत में नया सतनाम भवन बनाया जाए ।
5. लाठीचार्ज और सतनाम भवन धवस्तिकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जाँच की जाए ।
6. दोषियों के ख़िलाफ़ तत्काल FIR दर्ज की जाए ।
7. 16% आरक्षण बहाल किया जाए

प्रदेश सतनामी के कवर्धा शहर अध्यक्ष श्री सतीश डहरे के उपर पुलिस ने किया लाठी चार्ज।

मैनें लाठीचार्ज पर साफ आवाज उठाते रहे हुए कहा कि मेरे लोगों की लहूएं बही है हम कैसे बर्दाश्त करें तो उन्होंने कहा कि हमारे पुलिस वालों पर पथराव किए आपके लोग इसलिए थोड़ी बल का प्रयोग किया है लाठीचार्ज नहीं। मैने यह भी कहा कि मामला लंबित थी तो आपने दोनो पक्ष में समझाइश की पहल क्यों नहीं किया। क्यों जब प्रिंट लेवल की काम हो रही थी तो नही बलपूर्वक तोड़ा गया तो उन्होंने कहा कि हम समझाइश देते रहे और वे मकान बना लिया जिसके कारण गांव में आक्रोश व अशांति ज्यादा फैल गई थी, इसलिए यह कदम उठाया।
दिनेश चतुर्वेदी, प्रदेशाध्यक्ष
भीम रेजिमेंट (छत्तीसगढ़)

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