इंसानियत की रोज हत्या हो रही है। देश की बहन-बेटियां हवस के दरींदो के हाथो रोजाना दम तोड़ने के लिए मजबूर है। छत्तीसगढ़ प्रदेश में बलरामपुर से खबर आई थी कि; राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाली विलुप्तप्राय: जनजाति आदिवासी समुदाय “पहाड़ी कोरवा” की बेटी की हत्या की गई है। दरअसल इस परिवार की एक युवती ने 31 अगस्त को खुदकुशी कर ली थी। परिजनों का आरोप है कि, उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया गया और उसकी हत्या हुई है। उक्त घटना ने मीडिया में अपना स्थान भी नहीं बना पाया था कि, उतर प्रदेश के हाथरस में एक युवती के साथ बलात्कार के बाद निर्मम हत्या ने समूचे इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। हाथरस की इस घटना ने अभी मीडिया में व्याप्त अपनी सुर्खिया समेटी भी नहीं थी कि छत्तीसगढ़ प्रदेश से ही कोंडागांव जिला की एक युवती के साथ 7 लोगों ने जंगल में जाकर गैंगरेप किया था। घटना के 2 दिन बाद लड़की ने आत्महत्या कर ली थी।
विनोद नेताम
(संवाददाता)
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बालोद (hct)। देशभर में हाथरस गैंगरेप मामले को लेकर लोगों का आक्रोश अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि; छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में 14 साल की लड़की से रेप के मामले में प्रदेश सरकार के एक मंत्री शिव डहरिया के विवादित बयान ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। दरअसल बलरामपुर की घटना हुआ तो प्रेस कांफ्रेंस में एक पत्रकार के सवाल के जवाब में मंत्री शिव डहरिया ने कहा कि – “दुष्कर्म की यह छोटी घटना है, हाथरस जैसी बड़ी नहीं। जाँच चल रही है …

अब बलात्कार जैसी वीभत्स घटना भी परिभाषित की जाने लगी है ! खैर मंत्रीजी के इस बयान से उठे बवाल ने प्रदेश की राजनीति में एक-दो दिन उबाल मारकर विपक्षियों की रगो में दौड़ रही मानवता की खून को पानी में तब्दील कर दिया और जैसे सब कुछ शांत हो गया। लेकिन उक्त घटना को ज्यादा दिन नहीं हुआ है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के बालोद जिला के ग्राम चिरईगोड़ी में घटित एक और घटना; मीडिया में अपना अस्तित्व खोने जा रहा है। विगत महीने; ग्राम चिरईगोड़ी के एक युवती अनाम उम्र लगभग 20 वर्ष द्वारा घर पर ही फाँसी लगाकर आत्महत्या किया जाने का मामला उजागर हुआ है। जिसकी प्राथमिकी बालोद थाना में दर्ज होने की जानकारी मिली है। जानकारी के मुताबिक बालोद पुलिस ने मामले में कार्यवाही करते हुए आरोपी युवक, उम्र लगभग 22 वर्ष, बालोद थाना क्षेत्र निवासी के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए जेल भेजा गया है।

मामले को लेकर गाँव में विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। ग्रामीणों द्वारा बुधवार को गाँव में मीटिंग रखा गया। जिसमे गाँव के कुछ लोगों द्वारा कोषाध्यक्ष प्रेमलाल साहू को बुलाया गया; लेकिन प्रेमलाल साहू के द्वारा मीटिंग में नहीं आऊँगा मामला कोर्ट में चल रहा है कहे जाने पर, गाँव के कुछ लोगों के साथ गाली-गलौच और पुराने मामले को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा है, गाँव के कुछ लोग सरपंच खिलावन साहू, कोतवाल मुरारीदास, हेमंत साहू, पुनु राम, उत्तम साहू के खिलाफ बालोद थाने में कोषाध्यक्ष द्वारा शिकायत किया गया था। जिसके चलते चिरईगोड़ी गाँव के ग्रामीणों द्वारा लगभग 70 से 80 की संख्या में बालोद थाना पहुँचकर ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक जी एस ठाकुर से निष्पक्ष जाँच की माँग की है। जिस पर बालोद पुलिस अधीक्षक ने ग्रामीणों से गाँव के मीटिंग में पहुँच दोनों पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष जाँच करने की बात कही है।

आपको बता दे की मृतक युवती के दादा ने गांव के सरपंच, कोटवार व अन्य और दबंग रसूखदारों, नागरिकों के नाम पर नामजद शिकायत दर्ज करवाया है

मृतिका के पीड़ित दादा

मृतक युवती के दादा ने गंभीर आरोप लगाया है जिस पर शासन और प्रशासन को तत्काल ध्यान देने की आवश्कता है यहाँ आपको एक बार और पुन: ध्यान दिला दे कि बलात्कार करने के बाद में युवक ने युवती से शादी करने से मना करने की बात से इंकार करने पर आत्महत्या की थी जिसके आरोप में युवक इस वक्त जेल में है।

चिरईगोड़ी के ग्रामीण युवती के परिजनो के द्वारा बालोद पुलिस को दिये शिकायत से काफी आहत नजर आ रहे है ग्रामीणों की माने तो ग्रामीण समिति के सक्रिय सदस्य होने के नाते उनसे त्यौहारों के विषय में चर्चा हेतु बुलाया गया था जिस पर उन्हे गलतफहमी हो गई और वह बैगर किसी से पूछे थाना में जाकर रिपोर्ट दर्ज कर दिया जबकि मृतक युवती हमारे गाँव की ही बेटी है उनके साथ घटित घटना के लिए पूरा गाँव चिंतित व दुखी है।

ज्ञात हो कि कुछ दिनो पहले हुई हाथरस की घटना के वक्त घटना स्थल से लगे गांव के ग्रामीणों के द्वारा मीटिंग करते हुए वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुई थी जिसमें समुदाय विशेष से संबधित दुर्भावना की खबरो के बाद उतर प्रदेश की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी जैसी मांग तक कर डाली जिसकी लोगों ने तारीफ की।

बालोद की घटना सरकार और समाज के लिए कंलक है जंहा पर हमारी बच्चियाँ सुरक्षित नही है देश के हर नेता और सभी दल महिला सम्मान की बात करते हुए भीड़ के सामने रावण मारने को लार तपकाते हुये नजर आते जैसे मानो चौदह वर्ष की वनवास के दौरान इन्होंने ही कांदा खाया था, वैसे देखा जाये तो हमारे नेताओं के वनवास के नाम पर धुकधुकी छा जाती हैं। बेटियाँ क्या होती है हमे बताने की तनिक भी जरूरत नही है इसलिए हम समाज के सभी बेटियों के सम्मान के लिए अपनी कलम को सदैव तत्पर और आगे रखते आये है उम्मीद है, बालोद जिला प्रशासन और प्रदेश की सरकार बालोद क्षेत्र में घटित इस घटना में निष्पक्षता से जांचकर समाज की बेटी के लिए न्याय की मांग करेगी।

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