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किसी भी गाँव में जाति, गोत्र या परिवार की ‘इज़्ज़त’ के नाम पर होने वाली हत्याओं की बात होती है तो जाति पंचायत या खाप पंचायत का ज़िक्र आ ही जाता है। इस प्रचलन का प्रादुर्भाव उत्तर भारत से हुआ है। जैसे-जैसे गाँवों का विस्तार होते गया, वैसे-वैसे ऐसी चलन बढ़ता गया। लेकिन आश्चर्य ! इसी कड़ी में अब एक मामला छत्तीसगढ़ के बालोद से प्रकाश में आया है …

विनोद नेताम
(संवाददाता)

बालोद (hct)। ग्राम चिराईगोड़ी में एक बलात्कार पीड़िता के द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने के बाद पीड़िता के परिजन को सामाजिक दंश का शिकार बनाया जा रहा है। ग्रामवासियों का मृतिका के परिवार पर इस बात का दबाव बनाया जा रहा है कि किशोरी की आत्महत्या की जानकारी पहले ग्रामीणों को क्यों नहीं बताया गया। अब बैठक किया जाकर मृतिका के परिजन को परेशान किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम में 3 दिन से लगातार बैठक चल रहा है। कारण एक बलात्कार पीड़िता के द्वारा आत्महत्या किए जाने का है, क्योंकि उसके प्रेमी /आरोपी ने शादी से इंकार कर दिया था। जिस पर बालोद थाना में रिपोर्ट दर्ज किया गया है, अब गांव के लोगो का फरमान ये है कि उक्त घटना को पहले गॉंव के लोगो को क्यों नही बताये, रिपोर्ट क्यों किये ? जिसके कारण से मृतिका के दादा को बैठक करके बार-बार बुलाकर परेशान किया जा रहा है। बैठक में जाने से इंकार करने पर गॉंव के कोतवाल के माध्यम से थाने में शिकायत कर उल्टा पीड़ित के परिवार वालो को परेशान कर राजीनामा के लिये दबाव बनाया जा रहा है, जिससे मृतिका के दादा दहशत में है, उनके साथ कभी भी कुछ भी हो सकता है।

ये घटना आज भी इस बात को प्रमाणित करता है कि अब भी गॉंव में जंगल राज कायम है… बालोद जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर गॉंव में इस तरह की घटना बड़ी गंभीर है। मृतिका के दादा को परिचितों के द्वारा हिम्मत देने पर प्रशासन को टूटी फूटी भाषा मे शिकायत किया है।

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