उच्च न्यायालय की अवमानना से व्यथित है किसान

ग्राम सुरसाबाँधा के ग्रामीण
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गरियाबंद (hct)। ग्राम पंचायत सुरसाबाँधा द्वारा जब्त धान फसल को पीड़ित परिवारों को वापस दिलाने की मांग को लेकर पीड़ितों के पक्ष में तहसील कार्यालय राजिम के पास 7 नवम्बर को अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के राज्य सचिव तेजराम विद्रोही व पीड़ित किसान भूख हड़ताल करेंगे।

उक्ताशय की जानकारी देते हुए तेजराम विद्रोही ने कहा कि ग्राम पंचायत सुरसाबाँधा में पंचायत पदाधिकारी और ग्राम के मुखिया स्वयं भी शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किये हुए हैं, जिनकी संख्या 50 से ऊपर है और वे कब्जा की गई शासकीय भूमि से अपनी फसल काटकर घर ले जा रहे हैं लेकिन अन्य 27 परिवारों को ही बेदखल करने उनकी फसल को जब्त किया जा रहा है जिसे तैयार करने पीड़ित अपनी जमा पूँजी खर्च कर चुके हैं। कोरोना काल में जहाँ एक ओर अनाज व नगद राशि देकर सरकार द्वारा आम जनता की सहायता के लिए यथा संभव प्रयास किया जा रहा है, वही दूसरी ओर ग्राम पंचायत सुरसाबाँधा द्वारा किसानों से अनाज छीनना न्यायसंगत नहीं है।

ग्रामसभा एवं सरपंच की मिलीभगत से फसल चराई का प्रस्ताव पारित : ग्रामीण

इस मामले में कार्यालय कलेक्टर भू-अभिलेख शाखा जिला गरियाबंद द्वारा 27 अकटुबर 20 को अनुविभागीय अधिकारी (रा.) राजिम को नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने पत्र जारी किया है। भू-अभिलेख शाखा द्वारा जारी किया गया ये पत्र ग्राम सुरसाबाँधा के ताराचंद साहू, पोखराज साहू तथा अन्य समस्त ग्रामीणों के संदर्भित पत्रानुसार है।
पत्र का विषय अतिक्रमण हटाने एवं बोयी गई फसल को हटाकर उसे ग्राम पंचायत को सौपने के आदेश को स्थगित करने बाबत है। इस पत्र में उल्लेखित तथ्यों के अनुसार तहसील राजिम अंतर्गत सुरसाबाँधा गांव के पूर्वजों द्वारा भूमि खसरा नं 360, 356, 34, 37, 38/1, 39, 348, 447/1 एवं 797, 800 लगभग 40 – 50 वर्षों से पूर्व से ही आवेदकगणों के पूर्वजों के नाम उपरोक्त खसरा नं राजस्व अभिलेख में दर्ज है। किंतु ग्रामसभा एवं सरपंच की मिलीभगत से अतिक्रमण हटाने, फसल चराई कराने का प्रस्ताव पारित कर तहसीलदार तथा वन विभागीय अधिकारी को प्रेषित किया गया था। जिस पर तहसीलदार व वन विभागीय अधिकारी द्वारा बिना आवेदकों को सुनवाई का मौका दिये अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया गया।
उक्त आदेश के विरुद्ध छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त खसरा नं भूमि पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद भी तहसीलदार द्वारा ग्राम सुरसाबाँधा से अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया है जो कि उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना है।

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