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छगपापुनि के महा “भ्रष्ट” प्रबंधक; अशोक चतुर्वेदी 420 पर, ईओडब्ल्यू ने किया अपराध पंजीबद्ध।

क्या चतुरवेदी 420 को सजा दिला पाएगी सरकार ?

अशोक चतुर्वेदी, महा “भ्रष्टाचारी” प्रबंधक छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम

अपने कुकर्मों को दफ़नाने इस महाभ्रष्ट अधिकारी अशोक चतुर्वेदी ने “दोऊ हाथ उलीचिए” को सिद्ध करते हुए राजधानी के कुछ नामी-गिरामी पत्रकारों को भरपूर सौगात दी है, (प्रमाणिकता के लिए वीडियो फुटेज खंगाले जाए तो वे भी बेनकाब हो सकते हैं।)  मगर गीता उद्धृत सफाइनामा प्रस्तुत करने वाला यह भ्रष्टासुर गीता के इस श्लोक “कर्म किए जा फल की इच्छा” से कैसे अनभिज्ञ रह गया समझ से परे है।

रायपुर (hct)। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के महा “भ्रष्टाचारी” प्रबंधक अशोक चतुर्वेदी ने अपने बेटे की विदेश में शिक्षा के लिए पाठ्य पुस्तक निगम में अपनी पदस्थापना के दौरान सुनियोजित ढंग से “होप इंटरप्राइजेस व होप कंस्ट्रक्शन” नामक फर्म का अपने ही परिजन हितेश चौबे के नाम से गठन कर करोडों रुपए का ठेका देकर महाघोटाले को अंजाम दिया था।
सनद हो कि तब अशोक चतुर्वेदी का बेटा आदित्य चतुर्वेदी, एंटीगुआ में प्री मेडिसिन की पढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान अति अल्प अवधि में उसके द्वारा गठित फर्म को लगभग नब्बे करोड़ के आसपास इन्कम होने का अनुमान है। इस बात का खुलासा; अशोक चतुर्वेदी के द्वारा गठित फर्म के कर्ताधर्ता में लेन-देन को लेका आपसी तनातनी हुई जिसके सम्बन्ध में खुर्सीपार थाने में शिकायत दर्ज है
आपको बता दे कि अशोक (चतुर्वेदी) चतुरवेदी ने बड़ी ही चतुराई से अपने आपको बचाने की दृष्टि से “गीता उद्धृत सफाइनामा” भी पेश किया था।

अब जाकर दिनांक – 05.05.2020 को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने अशोक चतुर्वेदी, महाप्रबंधक, पाठ्य पुस्तक निगम रायपुर, हितेश चौबे, होप इन्टरप्राईजेस रायपुर, बृजेन्द्र तिवारी, होप इन्टरप्राईजेस रायपुर का कर्मचारी व पाठ्य पुस्तक निगम के निविदा समिति के सदस्यगण एवं अन्य के खिलाफ धारा- 120 बी, 420 467, 468, 471, भा.द.वि. एवं भ्र.नि.अधि. 1988 एवं सहपठित धारा-7 (सी) 13 (2) (संशोधित) भ्र.नि.अधि. 1988 यथासंशोधित भ्र.नि.अधि. 2018 के तहत अपराध क्रमांक- 19/2020 मामला दर्ज कर लिया है जिसका विवरण निम्न है :-

अपराध का विवरण:- छ.ग. पाठ्य पुस्तक निगम के अधिकारी श्री अशोक चतुर्वेदी एवं निविदा समिति के सदस्यो द्वारा लोक सेवक के पद पर पदस्थ होते हुये, अपने-अपने लोक कत्र्तव्यो को अनुचित एवं बेईमानी से जानबूझकर, कूटरचना कर, फर्जी तरीके से होप इन्टरप्राईजेस रायपुर के संचालक श्री हितेश चौबे, को आपस में अपराधिक षडयंत्र कर निविदा दी गई, जांच से फर्जी निविदा प्रस्तुत कर अपराधिक कृत्य किया जाना पाया गया है जिसमें 03 बनावटी निविदा प्रस्तुत कर निविदा पालन करने का दिखावा किया गया है। संपूर्ण निविदा प्रक्रिया, दूर्षित है, जिसके लिये श्री अशोक चतुर्वेदी महाप्रबंधक, छ.ग.पाठ्य पुस्तक निगम, एवं छ.ग. पाठ्य पुस्तक निगम के निविदा समिति के सदस्यगण एवं होप इन्टरप्राईजेस रायपुर के संचालक, श्री हितेश चौबे एवं होप इन्टरप्राईजेस का कर्मचारी बृजेन्द्र तिवारी एवं अन्य की भूमिका है। निविदा प्रक्रिया आमंत्रित करने का शासन का मुख्य उदे्श्य क्रय के लिये प्रतिस्पर्धा को बढाया जाए जिसके कारण शासन को क्रय के लिये उचित दर प्राप्त हो। किन्तु इस निविदा प्रक्र्रिया में केवल मेसर्स होप इन्टरप्राईजेस को लाभांवित करने के उदे्श्य से अन्य प्रतिस्पर्धियो के नाम से निविदा परीक्षण समिति के सदस्यो द्वारा लोकसेवक के रूप में पदस्थ होते हुये अपने लोक कत्र्तव्यो को अनुचित एवं बेईमानी से करते हुए मेसर्स होप इन्टरप्राईजेस के साथ आपस में मिलकर अपराधिक षडयंत्र कर फर्म/कंपनियों के दस्तावेज के आधार पर निविदा प्रक्रिया, में भाग लेना दिखाया गया तथा चूंकि, अन्य फर्म (01) मेसर्स न्यू क्रियेटिव फाईबर ग्लास रायपुर (02) मेसर्स एस.आर.इन्टरप्राईजेस जगदलपुर (03) मेसर्स मिनी सिग्नाजेस रायपुर, द्वारा अपने कथन में बताया गया है कि, उनके द्वारा निविदा प्रक्रिया क्रमांक-2578 दिनांक-02.11.2017 में भाग नहीं लिया गया है और न ही कोई दस्तावेज जमा किये गये है। चूंकि, होप इन्टरप्राईजेस के अतिरिक्त अन्य फर्म द्वारा निविदा प्रक्रिया में भाग नही लिया गया है। इसलिये मेसर्स होप इन्टरप्राईजेस रायपुर द्वारा दिए गये वित्तीय निविदा फार्म-बी में भरे गए निविदा प्रकिया उॅची दर पर मेसर्स होप इन्टरप्राईजेस को आबंटित की गई। इस प्रकार यह सम्पूर्ण निविदा प्रक्रिया दूषित है तथा इन निविदा आबंटन का मुख्य उद्देश्य केवल मेसर्स होप इन्टरप्राईजेस रायपुर को अवैध रूप से आर्थिक लाभ पहुंचाया तथा लोकसेवको द्वारा अपने को न्यायाशित संपत्ति को षडयंत्रपूर्वक कुटरचित दस्तावेज को छल के प्रयोजन से असली के रूप में प्रयोग करके स्वयं व अन्य को आर्थिक लाभ पहुचाया गया है एवं शासन के साथ धोखाधडी कर आर्थिक हानि कारित किये जाने का अपराध करना पाया गया। उल्लेखनीय है कि यह प्रकरण स्वेच्छा अनुदान मद-2016-17, 2017-18, 2018-19 के अन्तर्गत राशि में हुई अनियमितता से संबंधित है।

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