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क्या ! भूपेश बघेल छत्तीसगढ़िया हैं ?

रायपुरयहाँ इस समाचार के माध्यम से सवाल नहीं पूछा जा रहा है; बल्कि एक चौकाने वाले रहस्य से पर्दा उठाने जा रहे हैं। यह छत्तीसगढ़ का दुर्भाग्य ही है कि छत्तीसगढ़ के बाशिंदों को छत्तीसगढ़ राज्य बनने के 19 बरस के बाद भी एक मूल निवासी ठेठ छतीसगढिया मुख्यमंत्री नसीब नहीं हुआ है, राज्य गठन के बाद थोपे गए प्रथम पूर्व मुख्यमंत्री जिसके बारे में अभी तक यह रहस्य बना हुआ है कि वे किस समाज से है ? वे कभी खुद को आदिवासी बताते हैं तो कभी क्रिश्चन लेकिन, अजीत जोगी से प्रारम्भ हुई परिपाटी 15 बरस तक शासन करने वाले रमन सिंह भी ठेठ छत्तीसगढ़िया नहीं, अब आते हैं वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर…

बघेल गुजरात से भाग कर आए और छत्तीसगढ़ के उस इलाके में सेटल हुए

हाल ही में संम्पन्न हुए नगरीय निकाय चुनाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नन्द कुमार बघेल जिन्होनें खुली जिप्सी में सवार होकर पूर्व महापौर और वर्तमान के पार्षद प्रत्याशी प्रमोद दुबे (चुनावी समर में जीत हासिल कर चुके हैं) को बाहरी बताकर प्रचार-प्रसार कर रहे थे…

आज यहाँ दी गई एक वीडियो क्लिप से जाहिर होता है कि खुद वे छत्तीसगढ़िया नहीं है बल्कि गुजरात से भागकर आए हुए सोलंकी वंश से ताल्लुकात रखते हैं और अविभाजित मध्य प्रदेश के रीवा इलाके में आकर सेटल हुए परिवार से हैं।
NDTV पर वरिष्ठ पत्रकार मनोरंजन भारती द्वारा दी गई जानकारी

अब छत्तीसगढ़ के सौम्य मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं ये तो सोंचने वाली बात होगी। बहरहाल मन ये सवाल उठ रहा क्या वाकई छत्तीसगढ़ के मूल निवासी जो बरसों-बरस इन राजनेताओं के द्वारा छले-ठगे जा रहे हैं और उम्मीद लगाए बैठे थे कि राज्य बनने के बाद कोई ठेठ छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री हो, उनकी इस उम्मीद पर NDTV के इस उजागर से पानी फिर गया।

किसी व्यक्ति के दो-चार पीढ़ी किसी नगर/शहर/राज्य में आकर बस जाए तो वह उस नगर/शहर/राज्य की संस्कृति में घुल-मिल जाता है लेकिन वह वहां का मूल निवासी नहीं हो सकता। इसलिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कितना भी छत्तीसगढ़िया होने का स्वांग रच ले और चाहे वह कितना भी भौंरा चला ले, गेड़ी चढ़ ले और सोंटा (कोड़ा) मरवा ले, ठेठरी-खुरमी भी खा ले लेकिन वह भी बाहरी हैं या छत्तीसगढ़िया सवाल तो खड़ा होना लाजमी है।

“छत्तीसढिया क्रांति सेना” से एक सवाल : तुमने जो बाहरी कहकर दंगे मचाए क्या अब अपनी क्रांति की मशाल जलाए रखोगे ?

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