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गरियाबंद : आवास घोटाला, मुख्यमंत्री के आदेशों पर भ्रष्टाचार ने फेर दी लकीर…!

लफंदी पंचायत में रोजगार सहायिका पर हितग्राहियों की राशि गबन का आरोप, जियो टैगिंग में एक ही घर की तस्वीर 15 बार अपलोड अब कलेक्टर की जवाबदेही पर उठे सवाल

गरियाबंद hct : जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के नाम पर ऐसा घोटाला उजागर हुआ है, जिसने शासन की मंशा और प्रशासन की नीयत दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साफ निर्देश है कि “एक रुपये की भी गड़बड़ी हुई तो कलेक्टर पर कार्रवाई होगी”, लेकिन हकीकत यह है कि गांवों में फाइलों में मकान खड़े हैं और ज़मीन पर ईंट तक नहीं रखी गई।

राजिम के पास लफंदी पंचायत में रोजगार सहायिका दिलेश्वरी साहू पर आरोप है कि उन्होंने मस्टररोल में फर्जी नाम जोड़कर हितग्राहियों की राशि हड़प ली। जिन पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1 लाख 30 हजार रुपये की सहायता और मनरेगा से 25 हजार तक की मजदूरी मिलनी थी, उनके नाम पर रकम किसी और के खाते में पहुंच गई।

ग्रामीणों ने जब अपने मस्टररोल की ऑनलाइन जांच की, तो परत दर परत फर्जीवाड़े का खेल खुलता गया। मस्टररोल नंबर 2611 और 5286 में ऐसे लोगों के नाम पाए गए, जो गांव में रहते ही नहीं। अब तक करीब 45 हितग्राही सामने आ चुके हैं, जो खुलेआम कह रहे हैं कि उन्हें पैसा नहीं मिला, जबकि पोर्टल पर भुगतान “पूर्ण” दर्ज है।

जियो टैगिंग का डिजिटल खेल 

योजना की दूसरी परत जियो टैगिंग में खुली। देवभोग, मैनपुर और धुर्वागुड़ी जैसे इलाकों में जांच के दौरान पाया गया कि एक ही घर की तस्वीर 15 अलग-अलग लाभार्थियों के नाम पर पोर्टल पर अपलोड की गई। जिन घरों की नींव तक नहीं रखी गई थी, उन्हें “पूर्ण” दर्ज कर दिया गया। फाइलें बंद, रकम पास, और रिकॉर्ड चमकदार यह सब डिजिटल विकास के नाम पर किया गया।

इस खुलासे के बाद गरियाबंद के तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ जी.आर. मरकाम को पद से हटा दिया गया। उनकी जगह सारंगढ़ से प्रखर चंद्राकर को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। मरकाम पहले भी पंचायत सचिवों के एकल तबादलों को लेकर विवादों में घिरे रहे हैं, और अब इस घोटाले ने उनकी भूमिका पर और भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सचिव ने झाड़ा पल्ला अब जनदर्शन में शिकायत की तैयारी

जब मामला ग्राम सभा में उठा तो पंचायत सचिव ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इससे नाराज़ ग्रामीण अब कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि रोजगार सहायिका को तत्काल हटाया जाए और जिन हितग्राहियों के पैसे गबन हुए हैं, उन्हें उनका हक वापस मिले।

गौरतलब है कि लफंदी पंचायत फिंगेश्वर जनपद पंचायत अध्यक्ष का गृहग्राम भी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प है कि जिस गांव से ‘सत्ता’ की शुरुआत होती है, वहीं अब ‘सिस्टम’ की सफाई की शुरुआत कब होती है।

मुकेश सोनी, संवाददाता
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