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शिक्षा के मंदिर में अंडा अब जैन समाज उतरा विरोध में।

*हेमंत साहू
बालोद। कबीरपंथी समाज एवं अन्य समाजों द्वारा वर्तमान सरकार में आंगनबाड़ी एवं मध्यान भोजन में अंडा दिए जाने के विरोध के बाद अब जैन समाज भी आगे आया है एवं जैन समाज ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि अपना यह निर्णय वापस ले वरना सरकार को तकलीफ हो सकती है। जैन समाज के लोगों ने कहा अंडा मांसाहार हैं और यह बच्चों के लिए सही नहीं है। एक विद्यालय में एक ही समाज नहीं अपितु कई समाज के लोग अध्ययन करते हैं इसलिए सभी लोगों द्वारा अंडा ग्रहण कर पाना संभव नहीं है। जैन समाज के लोग युवा वर्ग एवं बुजुर्ग जिला मुख्यालय पहुंचे जहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
जैन समाज के वरिष्ठ नागरिक मांगीलाल जैन ने कहा कि यह आहार राक्षसी आहार कहलाता है और जैन समाज बालोद शहर इसका विरोध करता है। जैन समाज शुरू से शाकाहार का समर्थन करता है और समाज के लोग भी शाकाहारी हैं एक विद्यालय में अलग-अलग धर्म जाति समुदाय के लोग रहते हैं इसलिए यहां ऐसे भोजन देने की आवश्यकता है जो सभी को सूट करें।
जैन समाज के वरिष्ठ नागरिक अमित चोपड़ा ने कहा कि सरकार द्वारा मांसाहार को बढ़ावा दिया जा रहा है जो कि सही नहीं है, भूपेश बघेल की सरकार को इस संदर्भ में विचार करने की आवश्यकता है। हम विरोध करते हैं कि आंगनवाड़ी केंद्र और मध्यान्ह भोजन में अंडे को शामिल न किया जाए इसके स्थान पर फलाहारी सब्जी एवं सूखे फलों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस दौरान कहा कि आगे अगर सरकार सही फैसले नहीं लेती है तो हमें विरोध प्रदर्शन करने पर उतारू होना पड़ेगा।
इस अवसर पर जैन समाज के मोहन नाहटा, मनोहर नाहटा, ताराचंद सांखला, अजय सांखला, धनदत्त बाघमार, सुनील रत्न बोहरा, सुभाष ढेलडिय़ा, राहुल गोलछा, अजय बाफना, अनिल बाफना, सौरभ श्री श्रीमाल, नीलेश नाहटा, रमेश नाहटा, अमित नाहटा, आशीष ढ़ेलडिया, यश सांखला, विनय गोलछा, प्रशांत जैन, जिनी सांखला, प्रनेश जैन, शशांक लोढा, यश बुरड़, अंकित बाफना, मयंक नाहटा आदि युवा शक्ति के जैन बन्धु उपस्थित थे।

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