Editorial

“नवम्बर क्रांति” चिरजीवी हो।

File photo
“नवम्बर क्रांति” के सम्बन्ध मे आयोजित “शहीद स्मारक समिति” की बैठक आज मुख्यालय पर विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर “नवम्बर क्रांति” की रोशनी मे “क्रांति” को भारत में सफल बनाने का संकल्प लिया।
    महर्षि “मार्क्स” ने “नवम्बर क्रांति” को विकसित पूंजीवादी देश में सम्पन्न होने की बात कही थी लेकिन “लेनिन” ने “क्रांति” को रूस जैसे अविकसित पूंजीवादी देश मे सफल बनाकर विश्व मे एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। उसके बाद 100 सालों तक कहीं “क्रांति” नही हुई।
     अब भारत में “नवम्बर क्रांति” जैसी भौतिक वस्तु परिस्थिति तेजी से विकसित हो रही है जिसके लिए राष्ट्रीय ही नहीं अपितु विश्व की परिस्थिति अनुकूल होने एवम् विप्लवी नेतृत्व के गठन से ही क्रांति सम्भव होगी।
      भारत पूंजीवादी देश अवश्य है किन्तु आर्थिक दृष्टि से अत्यन्त कमजोर है। सारा मुनाफा स्वदेशी विदेशी अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियाँ मिलकर खा रही हैं। एक ओर जहाँ विप्लवी नेतृत्व का अभाव है वहीं विदेशी गोरों के स्थान पर स्वदेशी काले अंग्रेजों का राज जो गोरों की गुलामी से भी बदत्तर और खतरनाक है, क्रांति मे सबसे बड़ी बाधक है।
        “शहीद स्मारक समिति” की बैठक में विस्तार से अनुकूल तथा प्रतिकूल परिस्थितियों पर चर्चा हुई और तमाम साथियों सर्वहारा मजदूर वर्ग, युवकों, छात्रों, किसानों एवम् आम जन से उस दिशा में सक्रिय होने का आह्वान किया गया।
“दीवाली” के शुभ अवसर पर “नवम्बर क्रांति” दिवस मनाने को सुखद संयोग बताते हुए देशवासियों से “क्रांति” को सफल बनाने की अपील की गई।
अवध नारायण कृष्ण कुमार त्रिपाठी
“अंधेरों को तलाश है रौशनी की,
रौशनी भी फिदा है इन बुझे हुए दीयों पर।”
रायपुर (छ.ग.)
दिनांक 7 नवम्बर 2018

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